Mukhtar Ansari: 'हनुमान गेयर लगावत हई..', वारदात को अंजाम देने से पहले मुख्तार कहता था ये शब्द, खुल रही परतें
माफिया मुख्तार अंसारी का आपराधिक इतिहास लगभग 37 साल का है। मुख्तार अंसारी के खिलाफ वर्ष 1978 में पहली बार आपराधिक धमकी के आरोप में गाजीपुर के सैदपुर थाने में एनसीआर दर्ज की गई थी। मुख्तार की जन्मतिथि के अनुसार उस समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष रही होगी।
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माफिया मुख्तार अंसारी जरायम जगत में अपनी मनमर्जी और बेखौफ तरीके से वारदात को अंजाम देने के लिए कुख्यात रहा है। इसलिए जब वह किसी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की ठान लेता था तो अपने गुर्गों से कहता था कि हनुमान गेयर लगावत हई...। हनुमान गेयर लगावत हई कहने से मुख्तार अंसारी का तात्पर्य यह रहता था कि अब जो कुछ हो जाए, लेकिन वारदात को अंजाम देना ही है। यह मुख्तार का इतना चर्चित सूत्र वाक्य है कि इसके बारे में गाजीपुर और मऊ के उसके कई करीबी भलीभांति वाकिफ हैं।
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माफिया मुख्तार अंसारी का आपराधिक इतिहास लगभग 37 साल का है। मुख्तार अंसारी के खिलाफ वर्ष 1978 में पहली बार आपराधिक धमकी के आरोप में गाजीपुर के सैदपुर थाने में एनसीआर दर्ज की गई थी। मुख्तार की जन्मतिथि के अनुसार उस समय उसकी उम्र लगभग 15 वर्ष रही होगी। इसके बाद लगभग आठ वर्ष तक उसका नाम किसी भी आपराधिक घटना में सामने नहीं आया। वर्ष 1986 में मुख्तार अंसारी का नाम हत्या के मामले में सामने आया और मुहम्मदाबाद थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद जरायम जगत में मुख्तार ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गाजीपुर के मंडी परिषद के ठेकेदार सच्चिदानंद राय हत्याकांड, अवधेश राय हत्याकांड, कपिलदेव सिंह हत्याकांड, कोयला व्यापारी नंद किशोर रूंगटा का अपहरण व हत्या, मन्ना सिंह हत्याकांड, राम सिंह मौर्य व सिपाही सतीश कुमार हत्याकांड, कृष्णानंद राय हत्याकांड और मऊ दंगे जैसे प्रदेश और देश की चर्चित घटनाओं में मुख्तार का नाम सामने आया। इनमें से कई मामलों में मुख्तार अंसारी को अदालत से राहत भी मिली। वर्तमान समय में मुख्तार अंसारी पर दर्ज मुकदमों की संख्या 61 है।
भगोड़े सिपाही से एलएमजी खरीदने की थी तैयारी
मुख्तार अंसारी वर्ष 2004 में एक भगोड़े सिपाही से सेना की चुराई गई लाइट मशीन गन यानी एलएमजी खरीदने की तैयारी में था। इसका खुलासा एसटीएफ के तत्कालीन डीएसपी शैलेंद्र सिंह ने चौबेपुर क्षेत्र में छापा मार कर किया था। प्रकरण में मुन्नर यादव और बाबूलाल यादव को गिरफ्तार कर किया था। उनके पास से एलएमजी के साथ 200 कारतूस बरामद हुए थे। दोनों ने पूछताछ में बताया था कि मुख्तार एक करोड़ रुपये में एलएमजी खरीदने को तैयार था। इस प्रकरण में मुख्तार अंसारी के साथ ही गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद शैलेंद्र सिंह पर ऐसा राजनीतिक दबाव पड़ा कि उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।