दिव्यांग फुटबॉल प्रतियोगिता: गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगा गोल करेंगे सात राज्यों के 56 फुटबॉलर
वाराणसी में दिव्यांग फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन सिगरा स्टेडियम में होगा। इस दौरान सात राज्यों के 56 फुटबॉलर गेंद में बंधे घुंघरू की आवाज से अंदाजा लगाकर गोल करेंगे।
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दिव्यांग खेलों को बढ़ावा देने के लिए अखिल भारतीय दृष्टि बाधित फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्थित डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम में होगी। ऑल इंडिया दिव्यांग एसोसिएशन के डॉ उत्तम ओझा ने बताया कि इसमें खास तरह के फुटबॉल का प्रयोग होगा।
गेंद के अंदर विशेष घुंघरू लुढ़कने पर आवाज करती है। खिलाड़ी गेंद की आवाज के आधार पर गेंद का अंदाजा लगाकर गोल करने का प्रयास करते हैं। नवंबर में प्रस्तावित इस प्रतियोगिता में देश के सात राज्यों के 56 फुटबॉलर खेलेंगे।
उन्होंने आगे बताया कि गेंद सामान्य फुटबॉल से भारी होती है। इसमें उछाल कम होता है। इसे ही दृष्टि बाधित फुटबॉल (ब्लाइंड फुटबॉल) या 5-ए-साइड फुटबॉल भी कहा जाता है। यह फुटबॉल पूरी तरह से या आंशिक रूप से भी देखने में अक्षम खिलाड़ी के लिए डिजाइन की गई है। इसकी प्रतियोगिता इंटरनेशनल ब्लाइंड स्पोर्ट्स फेडरेशन (आईबीएसए) के नियमों के तहत खेला जाता है।
एक समय में प्रत्येक टीम के पांच-पांच खिलाड़ी मैदान पर होते हैं। चार खिलाड़ी पूरी तरह दृष्टि बाधित होते हैं। खेलने के दौरान चार खिलाड़ियों को अपनी आंखों पर आई-पैच (आई-ब्लाइंडफोल्ड) पहनना अनिवार्य है। गोलकीपर पूरी तरह से देखने में सक्षम होता है। वह डी-एरिया से बाहर नहीं निकल सकता और न ही गोल पोस्ट छोड़कर बाहर खेल सकता है।
मैदान पर खिलाड़ियों की मदद के लिए तीन गाइड होते हैं जो आवाज देकर खिलाड़ियों को बताते हैं कि उन्हें कहां जाना है और कब बॉल किक करनी है। दृष्टि बाधित फुटबॉल में 30 मिनट के मैच में 15-15 मिनट के दो हाफ होते हैं। कोच मिडफील्ड मैदान से खिलाड़ियों को निर्देश देते हैं।
बिना बोले गेंद पर अटैक करने पर होता है फाउल
जब भी कोई डिफेंडर (रक्षा करने वाला खिलाड़ी) गेंद छीनने के लिए आगे बढ़ता है, तो उसे स्पष्ट आवाज में वोई या गो अनिवार्य रूप से बोलना होता है। स्पेनिश शब्द वोई का अर्थ है मैं आ रहा हूं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि गेंद लेकर जा रहे खिलाड़ी को पता चल सके कि कोई सामने से आ रहा है। वोई नहीं बोलने पर फाउल दिया जाता है।
दर्शकों के लिए भी होती है गाइडलाइन
दृष्टि बाधित फुटबॉल में दर्शकों के लिए भी गाइडलाइन होती है। इसमें दर्शक ज्यादातर शांत रहते हैं। इसमें दर्शक तभी शोर या जश्न मना सकते हैं जब कोई टीम गोल करती है। ऐसा इसलिए कि खिलाड़ी गेंद की आवाज और अपने गाइड के निर्देशों को साफ-साफ सुन सकें और कमांड के आधार पर खेल को किक कर सके।
अधिकारी बोले
प्रदेश में पहली बार दिव्यांग खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए फुटबॉल प्रतियोगिता वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में कराई जाएगी। इसमें स्थानीय फुटबॉल संघ से मदद ली जाएगी। इससे दिव्यांग खिलाड़ियों में भी लोगों में खेल के प्रति जुनून बढ़ेगा और वे प्रेरित होंगे। -डॉ. संजय चौरसिया, आयोजन सचिव