पर्यटन से रोजगार पर जोर: अनंत काशी थीम पर FHRAI महाधिवेशन, 13 विभूतियों को ‘भारत गौरव सम्मान’; प्रदर्शनी
वाराणसी में ‘अनंत काशी’ थीम पर एफएचआरएआई महाधिवेशन का शुभारंभ हुआ। आयोजन में पर्यटन के जरिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने पर जोर दिया गया। काशी की 13 विभूतियों को ‘भारत गौरव सम्मान’ प्रदान किया गया। ‘अतुल्य भारत संध्या’ में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। इस दौरान पर्यटन प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें काशी की कला-संस्कृति और पर्यटन स्थलों को प्रदर्शित किया गया।
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नदेसर स्थित एक होटल में शुक्रवार को फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशंस ऑफ इंडिया के 56वें वार्षिक राष्ट्रीय महाधिवेशन का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय यह राष्ट्रीय महाधिवेशन ‘अनंत काशी: अध्यात्म, संस्कृति, व्यंजन और शिल्प से पर्यटन के भविष्य का नेतृत्व’ थीम पर आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल, गोवा के पर्यटन मंत्री रोहन ए. खौंटे, ओडिशा के उप-मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना सहित अन्य लोगों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
इसके बाद पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष गिरीश ओबेरॉय ने स्वागत भाषण दिया, जबकि एफएचआरएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार जायसवाल ने अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय पर्यटन व आतिथ्य क्षेत्र के भविष्य की रूपरेखा रखी।
इस दौरान रेडिसन होटल ग्रुप (दक्षिण एशिया) के अध्यक्ष के. बी. काचरू और विन्धम होटल्स के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (ईएमईए) दिमित्रिस मानिकिस ने भी अपने विचार साझा किए। महाधिवेशन के संरक्षक व उदयपुर के डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मुख्य विषय (थीम) पर विशेष प्रकाश डाला। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि काशी का स्वरूप अब बदल गया है।
पर्यटन के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि काशी अब पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात हो रही है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां काफी बदलाव आया है। यहां के युवा अब रोजगार की ओर अग्रसर हो रहे हैं। काशी का पर्यटन फॉर्मूला अब अन्य राज्य भी अपना रहे हैं।
काशी की विभूतियों को ‘एफएचआरएआई भारत गौरव सम्मान’
उद्घाटन संध्या का मुख्य आकर्षण काशी की कला, साहित्य, संगीत और ज्ञान परंपरा को समृद्ध करने वाली 13 विभूतियों को ‘एफएचआरएआई भारत गौरव सम्मान’ से सम्मानित करना रहा। इनमें प्रमुख रूप से भारत रत्न दिवंगत पंडित रवि शंकर एवं भारत रत्न दिवंगत उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्म विभूषण दिवंगत पंडित किशन महाराज, पद्म विभूषण दिवंगत गिरिजा देवी एवं पद्म विभूषण डॉ. देवी प्रसाद द्विवेदी, उपन्यास सम्राट दिवंगत मुंशी प्रेमचंद एवं करपात्री रत्न डॉ. नागेंद्र पांडेय को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा पद्मश्री डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी, पद्मश्री डॉ. रजनीकांत, पद्मश्री राजेश्वर आचार्य, पद्मश्री चंद्रशेखर, पद्मश्री पंडित गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ और पद्मश्री पंडित शिवनाथ मिश्र को सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के बाद अतुल्य भारत संध्या के तहत पंडित रुद्र शंकर मिश्र द्वारा कथक नृत्य, देवब्रत मिश्र द्वारा सितार वादन और उस्ताद रिज़वान हैदर द्वारा शहनाई वादन की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। इसके बाद कार्यक्रम के पहले दिवस का समापन हुआ।