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अब वाराणसी में लहरों पर तैरती जेटी से देखिए गंगा आरती
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 07 Jun 2017 02:55 PM IST
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अस्सी घाट पर लगा जेटी
- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी आने पर्यटकों को अस्सी घाट नए रूप में नजर आएगा। गंगा की लहरों पर तैरती जेटी से गंगा आरती देखने का अलग ही आनंद होगा। तमाम विरोध के बाद भी पर्यटकों को नावों पर पहुंचाने के लिए यहां जेटी लगा दी गई।
विरोधों को दर किनार कर दिल्ली की कंपनी अजय पिरामल ग्रुप ने चार महीने की लंबी मशक्कत के बाद जेटी लगाने में सफलता हासिल की। गंगा आरती के वक्त दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए लग रहे जेटी का विरोध उसके अस्तित्व में आने से पहले ही शुरू हो गया था।
नाविकों ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि इससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होगी और वे किसी भी कीमत पर जेटी नहीं लगने देंगे। अब फिर से
मल्लाहों ने जेटी लगाने के इस कदम का विरोध शुरू कर दिया है।
मां गंगा निषादराज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ने देर रात बताया कि बुधवार शाम को अस्सी से राजघाट के मल्लाहों की बैठक होगी। इसमें जेटी लगाए जाने के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार होगी।
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घाटों को एक रंग में रंगने और दशाश्वमेध घाट समेत आसपास के तीन घाटों को संवारने की योजना पर वर्ष भर पहले अजय पिरामल ग्रुप ने काम शुरू किया था। जेटी का निर्माण सामने घाट पर कराया गया।
करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई जेटी को दशाश्वमेध और शीतला घाट के आरती स्थल पर पर्यटकों को नावों पर सुरक्षित पहुंचाने के लिए लगाया जाना था लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया। मल्लाहों का कहना था कि जेटी लगने से उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी।
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विरोधों को दर किनार कर दिल्ली की कंपनी अजय पिरामल ग्रुप ने चार महीने की लंबी मशक्कत के बाद जेटी लगाने में सफलता हासिल की। गंगा आरती के वक्त दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए लग रहे जेटी का विरोध उसके अस्तित्व में आने से पहले ही शुरू हो गया था।
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नाविकों ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि इससे उनकी रोजी-रोटी प्रभावित होगी और वे किसी भी कीमत पर जेटी नहीं लगने देंगे। अब फिर से
मल्लाहों ने जेटी लगाने के इस कदम का विरोध शुरू कर दिया है।
मां गंगा निषादराज सेवा समिति के अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद ने देर रात बताया कि बुधवार शाम को अस्सी से राजघाट के मल्लाहों की बैठक होगी। इसमें जेटी लगाए जाने के विरुद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार होगी।
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घाटों को एक रंग में रंगने और दशाश्वमेध घाट समेत आसपास के तीन घाटों को संवारने की योजना पर वर्ष भर पहले अजय पिरामल ग्रुप ने काम शुरू किया था। जेटी का निर्माण सामने घाट पर कराया गया।
करीब 1.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई जेटी को दशाश्वमेध और शीतला घाट के आरती स्थल पर पर्यटकों को नावों पर सुरक्षित पहुंचाने के लिए लगाया जाना था लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया। मल्लाहों का कहना था कि जेटी लगने से उनकी रोजी रोटी प्रभावित होगी।
हाईकोर्ट तक पहुंची विरोध की बात
अस्सी घाट पर लगा जेटी
- फोटो : अमर उजाला
इस मसले पर जिला प्रशासन ने मध्यस्थता की और पिरामल ग्रुप - मल्लाहों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें की गईं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इस मसले को लेकर मां गंगा निषाद राज सेवा समिति ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने इस मामले के निस्तारण के लिए नगर आयुक्त के यहां प्रतिवेदन देने का आदेश दिया है। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि नगर आयुक्त को प्रतिवेदन दिया गया है लेकिन निस्तारण की सूचना अभी तक उनको नहीं दी गई। अलबत्ता अस्सी घाट पर जबरिया जेटी लगा दिया गया।
हाईकोर्ट ने इस मामले के निस्तारण के लिए नगर आयुक्त के यहां प्रतिवेदन देने का आदेश दिया है। समिति के अध्यक्ष ने बताया कि नगर आयुक्त को प्रतिवेदन दिया गया है लेकिन निस्तारण की सूचना अभी तक उनको नहीं दी गई। अलबत्ता अस्सी घाट पर जबरिया जेटी लगा दिया गया।