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बीएचयू: एंडोस्कोपी विधि से पहली बार पैंक्रियाटिक नेक्रोसिस का उपचार
Sat, 29 May 2021 04:54 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Sat, 29 May 2021 04:54 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के मरीज पैंक्रियाज के पास मवाद से परेशान रहता था। यह मुख्य रूप से पित्त की थैली में पथरी के कारण एवं शराब पीने से होता है।
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय।
विस्तार
बीएचयू के गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट में एंडोस्कोपी विधि से पहली बार पैंक्रियाटिक नेक्रोसिस का उपचार किया गया। पैंक्रियाज के पास मवाद से परेशान गाजीपुर निवासी मरीज इलाज के बाद अब स्वस्थ है और डॉक्टरों की टीम उसकी निगरानी कर रही है।
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गैस्ट्रोलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर देवेश यादव के मुताबिक पैंक्रियाटिक घातक एवं जटिल बीमारी होती है। यह मुख्य रूप से पित्त की थैली में पथरी के कारण एवं शराब पीने से होता है। इस बीमारी में पैंक्रियाज के आसपास मवाद इकठ्ठा हो जाता है, जो आगे चल कर समस्याओं को जन्म देता है और यह घातक भी हो सकता है। दवा से राहत न होने पर सर्जरी की आवश्यकता होती है। डॉक्टर देवेश ने बताया कि इस बीमारी का इलाज मुख्यत एंडोस्कोपी विधि से किया जाता है। इस विधि में जटिलता कम होती है। इसमें सिर्फ लगभग 30 मिनट लगता है। मरीज को अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती भी नहीं करना पड़ता है। यह प्रक्रिया गंभीर मरीजों में भी की जा सकती है। इनमें सर्जरी जोखिम भरा होता है।
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प्लास्टिक और मेटल स्टंट उपयोगी
डॉक्टर देवेश के अनुसार, एंडोस्कोपी की प्रक्रिया में प्लास्टिक और मेटल स्टंट का उपयोग होता है। बीएचयू के गेस्ट्रो विभाग में इस प्रक्रिया में प्लास्टिक स्टंट का उपयोग होता है। गाजीपुर निवासी मरीज भी पैंक्रियाज के आसपास मवाद की तकलीफ लेकर आया था, उसको लीवर की बीमारी भी थी। ऐसे केस में प्लास्टिक स्टंट बेहतर काम नहीं करता। मरीज की सहमति लेकर मेटल स्टंट डाला गया।
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इस विधि को सिस्टोग्रेस्ट्रोस्टोमी कहा जाता है। बताया कि यह प्रक्रिया बीएचयू में पहली बार की गई है। साथ ही इस विधि से इलाज पूर्वांचल में सिर्फ बीएचयू में शुरू हुआ है। डॉ. देवेश यादव ने बताया कि इसके पहले सिस्टोगैस्ट्रोस्टोमी के 15-20 केस, जिनमें प्लास्टिक स्टंट का उपयोग किया गया, भी उनके द्वारा बीएचयू में किया गया है। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. वीके दीक्षित, डॉ. विनोद कुमार, अनुराग तिवारी आदि मौजूद थे।