{"_id":"6ade6e947c372eaf9507fa15","slug":"fir-registered-over-allegations-of-selling-e-rickshaws-with-altered-chassis-numbers-varanasi-news-c-20-vns1022-1594102-2026-10-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: चेचिस नंबर बदलकर ई-रिक्शा बेचने का आरोप, प्राथमिकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: चेचिस नंबर बदलकर ई-रिक्शा बेचने का आरोप, प्राथमिकी
विज्ञापन
वाराणसी। नदेसर के शक्ति मोटर्स पर चेचिस नंबर बदलकर ई-रिक्शा बेचने, फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) देने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर कैंट थाने में शक्ति मोटर्स के प्रोपराइटर प्रतीक सर्राफ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।
चेतगंज के हबीबपुरा निवासी दीपक कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्होंने 16 दिसंबर 2025 को प्रतीक सर्राफ से 1.80 लाख रुपये में नोवा कंपनी का ई-रिक्शा खरीदा था। इसके लिए 80 हजार रुपये नकद दिए थे, जबकि शेष रकम अकासा फाइनेंस के माध्यम से फाइनेंस कराई गई थी। इसकी मासिक किस्त 7,438 रुपये निर्धारित की गई थी। आरोप है कि कई महीने बीतने के बाद भी उन्हें ई-रिक्शा की मूल आरसी नहीं दी गई। बाद में उन्हें यूपी नंबर की आरसी थमा दी गई। दीपक का दावा है कि जांच कराने पर पता चला कि उक्त आरसी का परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में कोई विवरण नहीं है। उन्होंने चेचिस नंबर बदलने का भी आरोप लगाया है।
पीड़ित के मुताबिक, इस संबंध में विरोध करने पर उनके घर लोगों को भेजकर किस्त वसूली का दबाव बनाया गया। साथ ही गाली-गलौज कर धमकी भी दी। उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
चेतगंज के हबीबपुरा निवासी दीपक कुमार गुप्ता के अनुसार, उन्होंने 16 दिसंबर 2025 को प्रतीक सर्राफ से 1.80 लाख रुपये में नोवा कंपनी का ई-रिक्शा खरीदा था। इसके लिए 80 हजार रुपये नकद दिए थे, जबकि शेष रकम अकासा फाइनेंस के माध्यम से फाइनेंस कराई गई थी। इसकी मासिक किस्त 7,438 रुपये निर्धारित की गई थी। आरोप है कि कई महीने बीतने के बाद भी उन्हें ई-रिक्शा की मूल आरसी नहीं दी गई। बाद में उन्हें यूपी नंबर की आरसी थमा दी गई। दीपक का दावा है कि जांच कराने पर पता चला कि उक्त आरसी का परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में कोई विवरण नहीं है। उन्होंने चेचिस नंबर बदलने का भी आरोप लगाया है।
विज्ञापन
पीड़ित के मुताबिक, इस संबंध में विरोध करने पर उनके घर लोगों को भेजकर किस्त वसूली का दबाव बनाया गया। साथ ही गाली-गलौज कर धमकी भी दी। उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। संवाद
विज्ञापन