Festivals: भादो में त्योहारों की बहार, तीज से चतुर्दशी तक बिखरेंगे उल्लास, नोट कर लें प्रमुख व्रतों के दिन
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा 31 अगस्त से शुरू हो चुकी है और समापन 29 सितंबर को होगा। इस दौरान कजरी तीज से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक त्योहारों की लंबी श्रृंखला है।
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सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी सावन के बाद अब भादो के त्योहार मनाएगी। कजरी तीज से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक त्योहारों की लंबी श्रृंखला है। नटवर नागर के जन्मोत्सव के साथ ही उमा महेश्वर के स्वरूप का पूजन होगा। इसके साथ ही संतान की कामना से सूर्योपासना का महापर्व लोलार्क छठ भी मनाया जाएगा।
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि भादो मास में भगवान श्रीकृष्ण, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की उपासना का खास महत्व है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा 31 अगस्त से शुरू हो चुकी है और समापन 29 सितंबर को होगा। अष्टमी और रोहिणी का संयोग नहीं बनने के कारण जन्माष्टमी का पर्व छह और सात सितंबर को मनाया जाएगा। छह सितंबर करे निशीथ व्यापिनी अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बनने के कारण गृहस्थों की जन्माष्टमी रहेगी।
ललही छठ पांच सितंबर को
वहीं वैष्णव जन की जन्माष्टमी सात सितंबर को रहेगी। कुशोत्पाटिनी अमावस्या भाद्रपद कृष्ण अमावस्या के पूर्वाह्न में मनाई जाती है। मान्यता है कि धार्मिक कार्यों, श्राद्ध कर्म आदि में इस्तेमाल की जाने वाली घास यदि इस दिन एकत्रित की जाए तो वह वर्षभर तक पुण्य फलदायी होती है। वैदिक ब्राह्मण इस दिन कुश उखाड़ कर लाते हैं। जो इस वर्ष 14 सितंबर को है। पांच सितंबर को ललही छठ मनाई जाएगी।
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29 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत
हरतालिका तीज पर महिलाएं सौभाग्य की कामना से उमा महेश्वर के स्वरूप का पूजन करेंगे। 18 सितंबर को तीज के साथ ही ढेला चौथ मनाई जाएगी। इसके साथ ही 19 सितंबर को ऋषि पंचमी का व्रत होगा। इसके साथ ही लोलार्क कुंड पर संतान प्राप्ति की कामना से 21 सितंबर को लोलार्क कुंड में स्नान का आयोजन होगा। 22 को राधाष्टमी के साथ लक्ष्मीकुंड पर लगने वाले सोरहिया मेले की शुरुआत हो जाएगी। इसमें लक्ष्मीकुंड पर मेला लगता है और लोग नियम से 16 दिन लक्ष्मी जी का दर्शन करने जाते हैं और अनूठी लक्ष्मी प्रतिमाएं खरीदते हैं। यह राधा जी का जन्म दिन भी है। भाद्रप्रद पूर्णिमा पर 29 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होगी।
अनंत चतुर्दशी से आरंभ होती हैं काशी की रामलीलाएं
28 सितंबर को चतुर्दशी को भगवान अनंत का व्रत होगा। इस दिन भुजा पर अनंत का धागा बांधते हैं और शेष भगवान की पूजा करते हैं। इसके साथ ही वाराणसी की प्रमुख रामलीला आरंभ हो जाएगी। अनंत चतुर्दशी को रंभाव्रत और कदली व्रत का भी दिन है। कहा जाता है कि इसी दिन द्रौपदी-चीरहरण हुआ था और भगवान ने अपना लीला दिखाई थी।
प्रमुख व्रत और त्योहार
एक सितंबर को कजरी तीज, तीन सितंबर को बहुला चतुर्थी, 10 सितंबर को अजा एकादशी, 12 सिंतबर को प्रदोष व्रत, 13 सितंबर को मासिक शिवरात्रि, 14 सितंबर को भाद्रपद अमावस्या, 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा, कन्या संक्रांति (सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश), 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी, 20 सितंबर को ऋषि पंचमी, स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।
19 सितंबर से आरंभ होगा पर्युषण पर्व
जैन बंधुओं का दस दिन का पर्युषण व्रत भी 19 दिसंबर से आरंभ होगा। दिगंबर जैन समाज का 19 सितंबर से 28 सितंबर तक दस लक्षण महापर्व मनाएगा।
विराजेंगे लाल बाग के राजा
गणेश उत्सव की शुरुआत 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी से होगी। इसकी समाप्ति 28 सितंबर को अनंत चतुर्थी पर होगी। आखिरी दिन बप्पा की मूर्ति का विसर्जन किया जाएगा। शहर में मराठी समाज की ओर से लाल बाग के राजा की प्रतिमा काे विराजमान कराकर गणेश पूजन किया जाएगा।