श्रमिकों के लिए फिर फरवरी बना काल, मानकों की अनदेखी पड़ रही भारी
सोनभद्र जिले के बिल्ली मारकुंडी क्षेत्र में स्थित खदानों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए फरवरी माह फिर काल बन गया। वर्ष 2012 में भी 27-28 फरवरी की रात में खदान में चट्टान खिसकने से 11 श्रमिकों को जान गंवानी पड़ी थी और इस बार भी फरवरी माह में ही शुक्रवार को चट्टान खिसकने से श्रमिकों की जान जोखिम में पड़ गई। हालांकि दो श्रमिक गंभीर रूप से घायल अवस्था में निकाल तो लिए गए और एक श्रमिक का शव भी निकाला जा चुका है लेकिन अब भी कुछ मजदूरों के चट्टान में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
उधर, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और खनन विभाग के जिम्मेदारों की लापरवाही का खामियाजा जहां श्रमिकों को जान देकर भुगतना पड़ता रहा है, वहीं सरकारी राजस्व को भी क्षति पहुंच रही है। कहा जा रहा है कि सोनभद्र के अधिकांश खदानों में सुरक्षा मानकों का जरा भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है। जो श्रमिक खदान में खनन के लिए उतरते हैं, उन्हें पहले सुरक्षा किट (वर्दी, हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, जैकेट व जूता आदि) दी जानी चाहिए लेकिन उसका भी अनुपालन खननकर्ताओं से विभाग नहीं करवा पा रहा है।
जैकेट में रेडियम लगा रहता है जो चमकता रहता है और इससे यह पता चलता है कि श्रमिक खदान में किस तरफ काम कर रहा है। खदान में श्रमिक को उतारने से पहले सारे सुरक्षा मानक पूरे कर लिए जाने चाहिए ताकि विपरीत परिस्थितियों में श्रमिक को बचाया जा सके लेकिन इसकी लगातार अनदेखी की जाती रही है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी का खामियाजा 2012 में हुए हादसे में 11 मजदूरों को जान देकर भुगतना पड़ा था। इसके अलावा छिटपुट घटनाएं भी घटती रही हैं लेकिन जिम्मेदार उसे दबा देते रहे हैं।
उधर, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष धर्मवीर तिवारी ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मसले पर जिलाधिकारी से मिलकर खदानों की मापी कराने, सुरक्षा मानकों तथा अब तक हुए खनन की जांच कराने की मांग की। भाजपा नेता ने कहा कि जिले में शायद ही किसी खदान में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से अधिकांश खदानों में अवैध खनन हो रहा है।
आरोपों की जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने खनन विभाग के अधिकारियों व खदान संचालकों पर मिलीभगत करके करोड़ों रुपये राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप भी लगाया। बताया कि जिलाधिकारी से शनिवार को मिलकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है।
फार्म बी और डी भी नहीं भरा जा रहा
अब जबकि एक बार फिर 2012 जैसी घटना की पुनरावृत्ति की बात सामने आ रही है तो यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार क्यों की जा रही है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी का आलम यह है कि फार्म-बी और डी तक नहीं भरा जा रहा है। दरअसल, फार्म-बी में खदान में उतरने वाले श्रमिक का पूरा विवरण होता है जबकि फार्म-डी में श्रमिक खदान में कब उतरा और कब निकला, उसका पूरा विवरण दर्ज किया जाता है। यह प्रक्रिया नियमित की जानी चाहिए लेकिन शायद ही किसी खदान में यह प्रक्रिया मानकों के अनुरूप पूरी की जा रही हो।
खनन विभाग अवैध खनन से कर रहा इंकार
यह बात अब किसी से नहीं छिपी रही कि जिले में अवैध पत्थर व बालू खनन का धंधा सिंडिकेट बनाकर चलाया जा रहा है। करीब ढाई महीने पहले लखनऊ से आई टीम की जांच में निर्धारित से ज्यादा क्षेत्र में पत्थर खनन, सुरक्षा मानकों की अनदेखी सहित अन्य कमियां मिलने प्रशासन की तरफ से 18 खदान संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उस दौरान यह कहा गया था कि राजस्व को हुई क्षति की भरपाई खदान संचालकों से जुर्माना वसूलकर की जाएगी।
लेकिन आरोपी खदान संचालकों से कितना जुर्माना वसूल किया गया और अवैध खनन पर और क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में खनन विभाग के अधिकारी अब तक चुप्पी साधे हुए हैं। उधर, सूत्रों का कहना है कि कई कागजों में हेराफेरी कर कई खदानों में पत्थर खनन कराया जा रहा है।
खान अधिकारी केके राय का कहना है कि जिले में वर्तमान में 41 खदानों में पत्थर खनन का कार्य चल रहा है। उनका यह भी कहना है कि जिल में अवैध रूप से खनन के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अवैध खनन की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।