भदोही में दो हजार किसानों को मिला भूमि अधिग्रहण का नोटिस, गोरखपुर तक बिछने वाली गैस पाइप लाइन का मामला
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गुजरात के कांडला से गोरखपुर तक बिछाई जाने वाली गैस पाइप लाइन कालीन नगरी भदोही के 44 गांवों से होकर गुजरेगी। इससे करीब ढाई हजार किसान प्रभावित होंगे। अभोली विकास खंड के बौरीबोझ समेत 43 गांवों में भूमि अधिग्रहण कराने के नाम पर कार्यदायी संस्था ने बिना गजट कराए ही दो हजार किसानों को नोटिस भेजवा दिया। नोटिस मिलते ही किसान भूमि अध्याप्ति विभाग का चक्कर काट रहे हैं।
पिछले साल केंद्र सरकार ने घरेलू गैस की कालाबाजारी को रोकने के लिए घर-घर पाइप लाइन से गैस पहुंचाने की घोषण की थी। इसके लिए चयनित कार्यदायी संस्था केजीपीएल ने कांडला-गुजरात से गोरखपुर तक तीन हजार किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछाने के लिए सर्वेक्षण शुरू कर दिया। सर्वेक्षण में जिले के अभोली, भदोही, ज्ञानपुर और औराई ब्लॉक के कुल 44 गांवों की सूची विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग को सौंपकर जमीन अधिग्रहण कराने पर सहमति मांगी। किसानों को मिलने वाले मुआवजे को राजस्व विभाग से सूचीबद्ध कराने के लिए कहा। भूमि अध्याप्ति विभाग ने बिना गजट कराए दो हजार किसानों को नोटिस भेज दिया। इसको लेकर किसान परेशान हैं।
किसान अपने हक-अधिकार के लिए संघर्ष को तैयार
किसान रामबहादुर सिंह, कैलाशनाथ, रामनिहोर, पंचू, विनोद कुमार ने आरोप लगाया कि 44 गांवों में बिछने वाली घरेलू गैस पाइप लाइन के लिए कार्यदायी संस्था और भूमि अध्याप्ति विभाग ने स्पष्ट नहीं किया कि अधिग्रहण गाटा भूमिधरी में होगी या परती आबादी में। यह तभी संभव हो सकेगा जब गजट कराकर भौतिक स्थिति को सामने लाया जाएगा। मनमानी करने पर किसान अपने हक-अधिकार के लिए संघर्ष भी करने के लिए तैयार रहेंगे। प्रभारी विशेष भूमि आधिपत्य अधिकारी योगेंद्र कुमार ने बताया कि गजट होने के बाद ही दो हजार किसानों को नोटिस भेजी गई है। कार्यदायी संस्था के जीएम राम सुमिरन ने कहा कि कंपनी शासन-प्रशासन की गाइड लाइन पर कार्य को पूरा कराएगी।
विवाद में फंसा एनएचएआई का 10 फीसदी मुआवजा
भूमि अध्याप्ति विभाग की उदासीनता से सिक्सलेन में जमीन देने वाले 50 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिल सका है। इसके लिए किसान भटक रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग-19 को सिक्सलेन में परिवर्तित करने के लिए अधिग्रहित की गई 2.94454 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा देने के लिए एनएचएआई ने 39 करोड़ की धनराशि विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग को दी थी। 10 फीसदी मामले विवाद में फंस जाने से न तो अभी तक चार किलोमीटर तक कार्य पूर्ण हो सका है न 93 लाख रुपये का भुगतान हुआ। पीडी एनएचएआई एके राय ने बताया कि अब तक 90 फीसदी धनराशि को भूमिधरी काश्तकार और आबादी की परती में बने मकानों को तोड़ने के एवज में दिया जा चुका है। राजस्व विभाग की उदासीनता से 10 फीसदी लाभार्थी किसान, मकान स्वामियों को नहीं मिल सका।