होश वाले उड़ गए ओ बावले चलते रहे...मशहूर शायर मेयार सनेही का वाराणसी में निधन
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बनारस की गंगा जमुनी तहजीब के अजीम उस्ताद शायर मेयार सनेही का शुक्रवार को निधन हो गया। 84 साल के मेयार सनेही ने वाराणसी के हरहुआ स्थित एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। परिजनों ने बताया कि हृदय गति रुकने से उनका निधन हुआ है। हिंदी और उर्दू के जाने माने शायर के इंतकाल से साहित्य जगत में शोक की लहर है। शनिवार को उनके शव को सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
युवा गजलकार अभिनव अरुण ने बताया कि मेयार सनेही साहब का जन्म सात मार्च 1936 को बाराबंकी में हुआ था। साहित्य रत्न तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने गजल लेखन का अटूट सिलसिला कायम किया। उनकी गजलों की किताब ख्याल के फूल की पंक्तियां कारवां से आंधियों की छेड़ भी क्या खूब थी, होश वाले उड़ गए ओ बावले चलते रहे...बेहद पसंद की जाती थीं। सनेही एक बड़े शायर के साथ-साथ एक बड़े इंसान थे। नई पीढ़ी को दिल खोलकर प्रोत्साहित करना उनका स्वभाव था।
गीतकार सुरेंद्र वाजपेयी ने बताया कि सनेही की गजलें रवायती ढांचे में ढली होने के बावजूद अपने अनोखे अंदाज के कारण भीड़ से अलग दिखाई देती हैं। अपने समय और समाज को बेहद सादगी के साथ चित्रित करना सनेही की खासियत थी। हिंदी उर्दू के लफ्जों को वो बहुत खूबसूरती से अपनी गजलों में ढालते थे। विगत 50 वर्षों से गजलों की अविरल धारा बहाने वाले विलक्षण शायर का जाना दुखद है।
सम्मान
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का सौहार्द सम्मान, साहित्यिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की ओर से सम्मान।
पुस्तक
वतन के नाम पांच फूल और ख्याल के फूल।