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Varanasi News: 132 साल बाद पुरखों का पता लगाने दक्षिण अमेरिका से गाजीपुर पहुंचा परिवार, बीएचयू में दिया सैंपल

Thu, 15 Oct 2026 01:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 01:32 AM IST
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Family arrives in Ghazipur from South America after years to trace their ancestry; provides samples at BHU.
पूर्वज 1894 में गिरमिटिया मजदूर के तौर पर भारत छोड़कर सूरीनाम के लिए निकले थे
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। 132 साल के बाद पुरखों की खोज में एक परिवार दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम से गाजीपुर पहुंचा। बुधवार को उन्होंने डीएनए सैंपल भी दिया। इनके पूर्वज 1894 में गिरमिटिया मजदूर के तौर पर भारत छोड़कर सूरीनाम के लिए निकले थे। बाद में अपने मूल से कट गए। बुधवार को बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग स्थित ज्ञान लैब में जॉन मोहनलाल रामनंदनलाल (70) और शारदा रामनंदनलाल अपने काशी और गाजीपुर के खानपुर गांव का दौरा किया। इस दौरान परिवार ने अपनी वंशावली की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे से चर्चा की।

परिवार ने बताया कि उनके पूर्वज रामनंदन और उनकी पत्नी राजवंतिया गाजीपुर के सैदपुर थाना अंतर्गत खानपुर गांव के रहने वाले थे। 1894 में रामनंदन की उम्र मात्र 24 वर्ष थी और उनके पिता का नाम होरोपुरसाद (हरि प्रसाद) था। वहीं, राजवंतिया की उम्र 22 वर्ष थी और उनके पिता का नाम बरम चारीलाल था। यह दंपति कायस्थ समुदाय से ताल्लुक रखता था। वह 25 अगस्त 1894 को कलकत्ता से ''''एम्स'''' नामक अंग्रेजी जहाज से गिरमिटिया मजदूर के रूप में सूरीनाम (पारामारिबो) के लिए निकले थे। उस जहाज पर करीब 400 से 500 अन्य यात्री भी सवार थे। 89 दिनों की लंबी और कठिन समुद्री यात्रा के बाद वह 22 नवंबर 1894 को पारामारिबो पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें निकेरी जिले के ''''वाटरलू'''' बागान में काम पर रखा गया था। सूरीनाम में बसने और अपना अनुबंध पूरा करने के बाद, 20 दिसंबर 1911 को रामनंदन और राजवंतिया ने आधिकारिक तौर पर विवाह किया। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि उनके बेटे जयकरम ने 15 अक्तूबर 1934 को आधिकारिक रूप से ''''रामनंदनलाल'''' उपनाम चुना, जिससे आज की यह पीढ़ी आगे बढ़ी है।
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