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निर्यातकों ने कहा मंदी, अधिकारी बोले ‘अच्छे दिन’
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 05 Oct 2016 01:49 PM IST
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nawaz modi
- फोटो : amarujala
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मंदी के दौर से गुजर रहे कालीन कारोबार के निर्यातकों के दर्द पर वस्त्र मंत्रालय पर्दा डालने में लगा है। जहां निर्यातक बुरे दौर से गुजरने और कारोबार में भारी नुकसान की बात कर रहे हैं तो केंद्रीय वस्त्र सचिव रश्मि वर्मा ने 17 से 25 प्रतिशत तक निर्यात में बढ़ोतरी का दावा किया है।
निर्यातकों की मानें तो अमेरिका में चुनाव, यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने और कई देशों में अशांति और गृह युद्ध से जूझने के चलते कार्पेट कारोबार प्रभावित हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि उनका 50 से 70 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ है। भदोही के असगर आसिफ का कहना है कि मंदी के दौर में निर्यातकों को जबरदस्त घाटा सहना पड़ रहा है। 70 प्रतिशत तक निर्यात प्रभावित हुआ है। यहीं के अभिषेक केशरी की मानें तो तिब्बती कार्पेट जिसे इंडो नेपाली कार्पेट भी कहते हैं, की विदेशों में अच्छी मांग है। बावजूद इसके मंदी का दौर चल रहा है। कुछ इसी तरह की बात अनिल कुमार सिंह कहते हैं।
एक्सपो में बंबू सिल्क से बनी कालीन लोगों को खासी आकर्षित कर रही है। एक स्टॉल पर कालीन पर शेर और पक्षियों के चित्र को खूबसूरत ढंग से उकेरा गया है। स्टॉल के प्रतिनिधि दिलीप सिंह ने बताया कि बंबू सिल्क की अमेरिका, रूस और मलयेशिया में जबरदस्त मांग है। मंगलवार को 317 विदेशी ग्राहक आए तो वहीं 250 से ज्यादा विदेशी ग्राहकों के प्रतिनिधि कार्पेट एक्सपो देखने पहुंचे।
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एक्सपो में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब शार्ट सर्किट से चिंगारी और उसके बाद चारों तरफ धुआं फैल गया। लोग 15 मिनट के लिए निकल कर बाहर रिसेप्शन पर आ गए। वहीं आयोजन स्थल की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। लगभग आधे घंटे बाद बिजली आई। इस दौरान केंद्रीय वस्त्र सचिव रश्मि वर्मा भी वीआईपी लाउंज में मौजूद थीं। वहीं दूसरी ओर एसी के ठीक ढंग से काम न करने की वजह से भी निर्यातकों को और खरीदारों को समस्या का सामना करना पड़ा।
निर्यातकों की मानें तो अमेरिका में चुनाव, यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने और कई देशों में अशांति और गृह युद्ध से जूझने के चलते कार्पेट कारोबार प्रभावित हुआ है। निर्यातकों का कहना है कि उनका 50 से 70 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ है। भदोही के असगर आसिफ का कहना है कि मंदी के दौर में निर्यातकों को जबरदस्त घाटा सहना पड़ रहा है। 70 प्रतिशत तक निर्यात प्रभावित हुआ है। यहीं के अभिषेक केशरी की मानें तो तिब्बती कार्पेट जिसे इंडो नेपाली कार्पेट भी कहते हैं, की विदेशों में अच्छी मांग है। बावजूद इसके मंदी का दौर चल रहा है। कुछ इसी तरह की बात अनिल कुमार सिंह कहते हैं।
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एक्सपो में बंबू सिल्क से बनी कालीन लोगों को खासी आकर्षित कर रही है। एक स्टॉल पर कालीन पर शेर और पक्षियों के चित्र को खूबसूरत ढंग से उकेरा गया है। स्टॉल के प्रतिनिधि दिलीप सिंह ने बताया कि बंबू सिल्क की अमेरिका, रूस और मलयेशिया में जबरदस्त मांग है। मंगलवार को 317 विदेशी ग्राहक आए तो वहीं 250 से ज्यादा विदेशी ग्राहकों के प्रतिनिधि कार्पेट एक्सपो देखने पहुंचे।
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एक्सपो में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब शार्ट सर्किट से चिंगारी और उसके बाद चारों तरफ धुआं फैल गया। लोग 15 मिनट के लिए निकल कर बाहर रिसेप्शन पर आ गए। वहीं आयोजन स्थल की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। लगभग आधे घंटे बाद बिजली आई। इस दौरान केंद्रीय वस्त्र सचिव रश्मि वर्मा भी वीआईपी लाउंज में मौजूद थीं। वहीं दूसरी ओर एसी के ठीक ढंग से काम न करने की वजह से भी निर्यातकों को और खरीदारों को समस्या का सामना करना पड़ा।