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पगडंडियों से पुल तक पड़ताल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 04 Jan 2017 01:53 AM IST
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हादसे की जांच करने पहुंचे न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजमणि चौहान (बीच में )।
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राजघाट भगदड़ प्रकरण में गठित न्यायिक जांच आयोग ने मंगलवार को कटेसर की पगडंडियों से होते हुए राजघाट पुल तक गहन पड़ताल की। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजमणि चौहान ने कटेसर से राजघाट तक बारीकी से सभी तथ्यों को सहेजा और सभी संबंधितों पक्षों को सुना। न्यायमूर्ति चौहान तब हैरान रह गए जब पुल की चौड़ाई और पुल की शुरुआत से घटनास्थल की दूरी पूछने पर वाराणसी और चंदौली जिले के अधिकारी बगली झांकने लगे। इस पर आश्चर्य जाहिर करते हुए न्यायमूर्ति चौहान ने अफसरों को फटकार लगाई और कहा कि घटना को इतने वक्त बीत गए और जांच की बेसिक चीजें ही आपको नहीं पता।
न्यायमूर्ति चौहान के निर्देश पर लेखपाल को बुलाकर तत्काल घटनास्थल की मापी कराई गई। इस दौरान वाराणसी और चंदौली के अफसरों ने अपने-अपने पक्ष में पेशबंदी की कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर हादसे की मूल वजह के तौर पर यही समझाने का प्रयास किया कि ट्रेन गुजरने की वजह से पुल हिलने की अफवाह से भगदड़ मची।
बता दें कि बीते 15 अक्तूबर को जय गुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज बाबा की शोभायात्रा के दौरान राजघाट पुल पर मची भगदड़ में 25 लोगों की मौत हो गई थी। सौ से अधिक लोग घायल हो गए थे। डीएम और एसएसपी के तबादले के साथ ही नौ अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। मुख्यमंत्री की ओर से गठित न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजमणि चौहान मंगलवार की सुबह दस बजे पहले चंदौली के कटेसर गांव पहुंचे, जहां पंकज बाबा और उनके अनुयायियों का कैंप था। यहां ग्रामीणों से घटना के बारे में जानकारी की। 30 एकड़ में यहां बने सत्संग स्थल का नजरी नक्शा और कार्यक्रम, शोभायात्रा की अनुमति की कॉपी अफसरों से तलब की। इसके बाद घटनास्थल राजघाट पुल पहुंचे।
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वहां चंदौली के डीएम कुमार प्रशांत समेत अन्य अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल वाराणसी में है तो वहीं वाराणसी के अफसर बताते रहे कि चंदौली प्रशासन की ओर से भीड़ के बारे में सटीक सूचना नहीं दी गई। तत्कालीन एसपी सिटी सुधाकर यादव, एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय, सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर सिंह समेत अन्य अफसरों ने न्यायमूर्ति चौहान के समक्ष सफाई दी। अध्यक्ष ने सभी को अपना-अपना पक्ष लिखित रूप में देने को कहा। आयोग के अध्यक्ष बुधवार को आम लोगों का और गुरुवार को अफसरों का पक्ष सुनेंगे। सुबह 10:30 बजे से कोई भी घटना के बाबत अपनी बात आयोग के समक्ष रख सकता है।
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न्यायमूर्ति चौहान के निर्देश पर लेखपाल को बुलाकर तत्काल घटनास्थल की मापी कराई गई। इस दौरान वाराणसी और चंदौली के अफसरों ने अपने-अपने पक्ष में पेशबंदी की कोई कसर नहीं छोड़ी। फिर हादसे की मूल वजह के तौर पर यही समझाने का प्रयास किया कि ट्रेन गुजरने की वजह से पुल हिलने की अफवाह से भगदड़ मची।
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बता दें कि बीते 15 अक्तूबर को जय गुरुदेव के उत्तराधिकारी पंकज बाबा की शोभायात्रा के दौरान राजघाट पुल पर मची भगदड़ में 25 लोगों की मौत हो गई थी। सौ से अधिक लोग घायल हो गए थे। डीएम और एसएसपी के तबादले के साथ ही नौ अफसरों को निलंबित कर दिया गया था। मुख्यमंत्री की ओर से गठित न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राजमणि चौहान मंगलवार की सुबह दस बजे पहले चंदौली के कटेसर गांव पहुंचे, जहां पंकज बाबा और उनके अनुयायियों का कैंप था। यहां ग्रामीणों से घटना के बारे में जानकारी की। 30 एकड़ में यहां बने सत्संग स्थल का नजरी नक्शा और कार्यक्रम, शोभायात्रा की अनुमति की कॉपी अफसरों से तलब की। इसके बाद घटनास्थल राजघाट पुल पहुंचे।
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वहां चंदौली के डीएम कुमार प्रशांत समेत अन्य अधिकारियों ने कहा कि घटनास्थल वाराणसी में है तो वहीं वाराणसी के अफसर बताते रहे कि चंदौली प्रशासन की ओर से भीड़ के बारे में सटीक सूचना नहीं दी गई। तत्कालीन एसपी सिटी सुधाकर यादव, एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय, सिटी मजिस्ट्रेट विजय बहादुर सिंह समेत अन्य अफसरों ने न्यायमूर्ति चौहान के समक्ष सफाई दी। अध्यक्ष ने सभी को अपना-अपना पक्ष लिखित रूप में देने को कहा। आयोग के अध्यक्ष बुधवार को आम लोगों का और गुरुवार को अफसरों का पक्ष सुनेंगे। सुबह 10:30 बजे से कोई भी घटना के बाबत अपनी बात आयोग के समक्ष रख सकता है।