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महंगा आटा, जेब को घाटा
ब्यूरो, अमर उजाला वाराणसी
Updated Sun, 27 Nov 2016 02:19 AM IST
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नोटबंदी की मार ‘दो जून की रोटी’ पर भी पड़ी है। महंगा हुआ आटा आम परिवारों के बजट पर भारी पड़ गया है। नोटबंदी के बाद से अब तक आटे के दाम में प्रति क्विंटल आठ सौ से एक हजार रुपये तक बढ़ोतरी हुई है। आने वाले दिनों में दाम में और उछाल देखने को मिल सकता है।
बताया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद नगदी संकट के चलते आटा मिल संचालक किसानों या फिर आढ़तियों से गेहूं नहीं खरीद पा रहे हैं। जिन मिल संचालकों के पास पहले का स्टाक है, वे ही मार्केट में आटे की सप्लाई कर पा रहे हैं। जमाखोरों के लिए यह मुनाफे का मौका बन गया है।
नोटबंदी के पहले थोक बाजार में आटा प्रति क्विंटल 1800 से 1900 रुपये था, जो अब 2700 से 2800 रुपये तक पहुंच गया है। खास यह कि नगदी संकट बना रहा तो आने वाले समय में आटे के दाम में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। नोटबंदी से उपजी समस्याओं से जूझ रहे आम परिवारों के लिए आटे की महंगाई ने एक और मुसीबत खड़ी कर दी है।
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गृहस्थी का बजट गड़बड़ाया हुआ है। नोटबंदी के बाद से दाम में लगातार वृद्धि के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं। जमाखोरी रोकने के लिए कोई कदम न उठाए जाने से दाम नियंत्रण से बाहर हो गए हैं।
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बताया जा रहा है कि नोटबंदी के बाद नगदी संकट के चलते आटा मिल संचालक किसानों या फिर आढ़तियों से गेहूं नहीं खरीद पा रहे हैं। जिन मिल संचालकों के पास पहले का स्टाक है, वे ही मार्केट में आटे की सप्लाई कर पा रहे हैं। जमाखोरों के लिए यह मुनाफे का मौका बन गया है।
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नोटबंदी के पहले थोक बाजार में आटा प्रति क्विंटल 1800 से 1900 रुपये था, जो अब 2700 से 2800 रुपये तक पहुंच गया है। खास यह कि नगदी संकट बना रहा तो आने वाले समय में आटे के दाम में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। नोटबंदी से उपजी समस्याओं से जूझ रहे आम परिवारों के लिए आटे की महंगाई ने एक और मुसीबत खड़ी कर दी है।
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गृहस्थी का बजट गड़बड़ाया हुआ है। नोटबंदी के बाद से दाम में लगातार वृद्धि के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं। जमाखोरी रोकने के लिए कोई कदम न उठाए जाने से दाम नियंत्रण से बाहर हो गए हैं।