{"_id":"5dcdb5c68ebc3e54c851ee12","slug":"eow-varanasi-news-vns4943870139","type":"story","status":"publish","title_hn":"30 लाख रुपये के खाद्यान्न घोटाले का आरोपी कोटेदार गिरफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
30 लाख रुपये के खाद्यान्न घोटाले का आरोपी कोटेदार गिरफ्तार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। बलिया जिले के फेफना थाना के वैना निवासी कोटेदार रामायन गिरि को गुरुवार को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) की वाराणसी इकाई ने गिरफ्तार किया। रामायन बलिया जिले मेें 30 लाख 31 हजार 350 रुपये के खाद्यान्न घोटाले का आरोपी है।
रामायन के अनुसार, कार्य प्रभारी आदि से मिलीभगत कर खाद्यान्न को खुले बाजार में बेच दिया गया था और पात्र लाभार्थियों की हितों की अनदेखी की गई थी। घोटाले के अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
बलिया जिले के हनुमानगंज विकास खंड में वर्ष 2002 से 2005 तक संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत श्रमिकों से काम कराने और उसके बदले खाद्यान्न दिलाने की योजना चलाई गई थी। योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे तो जांच कराई गई। सामने आया कि योजना के 15 लाख 80 हजार 660 रुपये नगद और 14 लाख 50 हजार 690 रुपये के खाद्यान्न का भुगतान कागजों पर फर्जी तरीके से किया गया। प्रकरण को लेकर वर्ष 2006 में बलिया जिले के सुखपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसकी जांच ईओडब्ल्यू की वाराणसी इकाई को सौंपी गई।
विज्ञापन
एसपी ईओडब्ल्यू सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर गोविंद सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। प्रकरण के आरोपी तत्कालीन कोटेदार रामायन गिरि के वाराणसी में मौजूद होने की सूचना मिली तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। रामायन से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
विज्ञापन
रामायन के अनुसार, कार्य प्रभारी आदि से मिलीभगत कर खाद्यान्न को खुले बाजार में बेच दिया गया था और पात्र लाभार्थियों की हितों की अनदेखी की गई थी। घोटाले के अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
विज्ञापन
बलिया जिले के हनुमानगंज विकास खंड में वर्ष 2002 से 2005 तक संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना के अंतर्गत श्रमिकों से काम कराने और उसके बदले खाद्यान्न दिलाने की योजना चलाई गई थी। योजना के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठे तो जांच कराई गई। सामने आया कि योजना के 15 लाख 80 हजार 660 रुपये नगद और 14 लाख 50 हजार 690 रुपये के खाद्यान्न का भुगतान कागजों पर फर्जी तरीके से किया गया। प्रकरण को लेकर वर्ष 2006 में बलिया जिले के सुखपुरा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। इसकी जांच ईओडब्ल्यू की वाराणसी इकाई को सौंपी गई।
विज्ञापन
एसपी ईओडब्ल्यू सत्येंद्र कुमार ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर गोविंद सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। प्रकरण के आरोपी तत्कालीन कोटेदार रामायन गिरि के वाराणसी में मौजूद होने की सूचना मिली तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया। रामायन से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।