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हॉकी खिलाड़ियों में उत्साह, लोगों में खुशी

Sat, 24 Jul 2021 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 10:21 PM IST
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Enthusiasm in hockey players, happiness among people
गाजीपुर के करमपुर स्थित मेघबरन स्टेडियम। संवाद - फोटो : GHAZIPUR
गाजीपुर। हॉकी की प्रतिभाओं को सामने लाने वाले तेजबहादुर सिंह को प्रदेश सरकार ने मरणोपरांत द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए नामित किया है। इस पर खिलाड़ियों ने खुशी जताई है। वहीं, क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह उनके लिए गौरव की बात है।
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जिले के छोटे से गांव करमपुर के रहने वाले स्व. तेजबहादुर सिंह मेघबरन स्टेडियम में खिलाड़ियों को हॉकी की बारीकियां सिखाने के लिए साढ़े तीन दशक तक समर्पित रहे। यह उन्हीं की मेहनत का नतीजा है कि यहां के कई खिलाड़ियों ने जूनियर और सीनियर टीम में जगह बनाई और कई खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी भी मिली। टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले ललित उपाध्याय ने तेजबहादुर सिंह को याद करते हुए कहा कि करमपुर छोटा सा गांव है, पर यहां हॉकी को लेकर खिलाड़ियों में आशा पैदा करने का काम तेजू भैया ने किया। उन्होंने यहां स्टेडियम, आवास और भोजन की सुविधाएं उपलब्ध कराकर हॉकी खेलने वाले लोगों को प्रेरित किया। करमपुर के मेघबरन स्टेडियम के हॉकी कोच इंद्रदेव ने बताया कि यहां हॉकी का प्रशिक्षण लेने वालों में आज तीन बड़े खिलाड़ी हैं। इनमें अजित पांडेय जूनियर टीम में हैं। इसी तरह, राजकुमार पाल सीनियर नेशनल टीम के कोर ग्रुप में हैं, तो ललित उपाध्याय टोक्यो ओलंपिक में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इंद्रदेव ने बताया कि उन्होंने करमपुर में हॉकी खेलना सीखा। बताया कि तेजू भैया का इस साल अप्रैल में निधन हो गया। स्टेडियम और खिलाड़ियों के बीच ही तेजू भैया का मन रमता था। खिलाड़ी बाहर खेलने जाते तो भी वह करमपुर में ही जूनियर खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करते रहते थे। बताया कि साल 1984 में तरवां के सीवी इंटर कालेज में एक मैच में करमपुर की टीम तरवां से हार गई। इसके बाद उन्होंने खिलाड़ियों से काफी मेहनत करवाई। इसके 10 साल बाद करमपुर की टीम पंजाब, ओडिसा और रांची की टीमों से भी अच्छी मानी जाने लगी। बताया कि ऑल इंडिया स्तर के छह मेडल हमारे पास हैं। सपा के पूर्व सांसद और तेजबहादुर सिंह के भाई राधेमोहन सिंह का कहना है कि मेघबरन स्टेडियम में विश्व स्तरीय एस्ट्रो टर्फ लगवाने के लिए भैया कह रहे थे। साल 2008 तक इसके लिए कई बार प्रयास किया गया। वर्ष 2009 में जब गाजीपुर से सांसद बना तो एस्ट्रो टर्फ की मांग संसद में उठाई। तब ग्रामीण इलाके में एस्ट्रो-टर्फ लगाने को कोई तैयार नहीं था। बाद में वर्ष 2015 में केंद्र और राज्य सरकार की मदद से करीब छह करोड़ की लागत का एस्ट्रो-टर्फ करमपुर के मेघबरन स्टेडियम में लगा। इस तरह भैया का सपना पूरा हुआ।
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