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काशी आए फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने किया कुछ ऐसा, बन गया इतिहास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 13 Mar 2018 06:18 PM IST
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विजिटर बुक में लिखते मैक्रों
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पहली बार आए फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष इमैनुएल मैक्रों दीनदयाल हस्तकला संकुल भी गए। वहां पर उन्होंने यह काम करके पहले मेहमान बनने का गौरव हासिल किया।
पीएम मोदी और अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ इमैनुएल मैक्रों ने बनारस के दीनदयाल हस्तकला संकुल में शिल्प और हुनर देखा जो उन्हें खासे पसंद आए। म्यूजियम में सजीव प्रदर्शन में जीआई उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे।
जब फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भारत के प्रधानमंत्री यहां पहुंचे तो पीएम ने सभी कलाकारों को अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन करने को कहा। इसके बाद सबसे पहले वह जरी जरदोजी के स्टॉल पर पहुंचे। यहां लोहता की अफसाना और तरन्नुम ने उन्हें फ्रांस का एंबलम दिखाया और उसे राष्ट्राध्यक्ष को भेंट किया।
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इसके बाद इमैनुएल मैक्रों ने हस्तकला संकुल की विजिटर बुक में सबसे पहले 12 मार्च की तारीख दर्ज की, फिर फ्रेंच में अपनी भावनाओं को उकेरा। उन्होंने यहां की हस्तशिल्प, बुनकरी, कला को अद्भुत बताया।
लिखा, ‘मुझे बहुत अच्छा लगा। पीएम मोदी ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। काशी और यहां की कला और शिल्प अद्भुत है। इनकी अपार संभावनाएं हैं।’ अंत में अंग्रेजी में नमस्ते लिखा और हस्ताक्षर किए। साथी सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को बधाई दी।
गौरतलब है कि हस्तकला संकुल में सोमवार से ही विजिटर बुक परंपरा की शुरुआत हुई। इमैनुएल मैक्रों बुक में अपनी भावनाएं लिखने वाले पहले मेहमान हैं।
इसके साथ ही अब यह इतिहास में रहेगा कि दीनदयाल हस्तकला संकुल के विजिटर बुक पर सबसे पहले फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने हस्ताक्षर किया है।
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पीएम मोदी और अपनी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों के साथ इमैनुएल मैक्रों ने बनारस के दीनदयाल हस्तकला संकुल में शिल्प और हुनर देखा जो उन्हें खासे पसंद आए। म्यूजियम में सजीव प्रदर्शन में जीआई उत्पादों के स्टॉल लगाए गए थे।
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जब फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ भारत के प्रधानमंत्री यहां पहुंचे तो पीएम ने सभी कलाकारों को अपनी-अपनी कलाओं का प्रदर्शन करने को कहा। इसके बाद सबसे पहले वह जरी जरदोजी के स्टॉल पर पहुंचे। यहां लोहता की अफसाना और तरन्नुम ने उन्हें फ्रांस का एंबलम दिखाया और उसे राष्ट्राध्यक्ष को भेंट किया।
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इसके बाद इमैनुएल मैक्रों ने हस्तकला संकुल की विजिटर बुक में सबसे पहले 12 मार्च की तारीख दर्ज की, फिर फ्रेंच में अपनी भावनाओं को उकेरा। उन्होंने यहां की हस्तशिल्प, बुनकरी, कला को अद्भुत बताया।
लिखा, ‘मुझे बहुत अच्छा लगा। पीएम मोदी ने बहुत अच्छी व्यवस्था की है। काशी और यहां की कला और शिल्प अद्भुत है। इनकी अपार संभावनाएं हैं।’ अंत में अंग्रेजी में नमस्ते लिखा और हस्ताक्षर किए। साथी सभी अधिकारियों, कर्मचारियों को बधाई दी।
गौरतलब है कि हस्तकला संकुल में सोमवार से ही विजिटर बुक परंपरा की शुरुआत हुई। इमैनुएल मैक्रों बुक में अपनी भावनाएं लिखने वाले पहले मेहमान हैं।
इसके साथ ही अब यह इतिहास में रहेगा कि दीनदयाल हस्तकला संकुल के विजिटर बुक पर सबसे पहले फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष ने हस्ताक्षर किया है।
दिल्ली से मंगाई गई थी विशेष पेन
महिला बुनकरों ने राष्ट्राध्यक्ष को दिया फ्रांस का एंबलम
- फोटो : twitter
फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए दिल्ली से काले रंग की विशेष पेन मंगाई गई थी। इस पर गांधी जी का चित्र बना हुआ था। मैक्रों को बैठने के लिए खास नक्काशीदार मेज-कुर्सी कैंटानमेंट स्थित एक होटल से रविवार की देर रात मंगाई गई थी। प्रधानमंत्री ने गुजराती शैली में तैयार कुर्सी और मेज को देखकर कहा कि यहां भी गुजराती शैली प्रसिद्ध है।
फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष और पीएम मोदी को मास्टर शिल्पी श्रीप्रकाश ने साड़ी की बुनाई और उस पर होने वाली कारीगरी से रूबरू कराया। डिजाइन ग्राफ पेपर दिखाते हुए बताया कि इसके अनुरूप एक साड़ी तैयार करने में 15 दिन लग जाते हैं।
बता दें कि शिल्प के मामले में फ्रांस भी भारत की ही तरह बेहद समृद्ध है। वहां बुनकरी काफी विकसित है। ब्रिकिटी मैक्रों ने साड़ी और कालीन तैयार करने के लाइव डेमो के फोटो भी खींचे।
फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष और पीएम मोदी को मास्टर शिल्पी श्रीप्रकाश ने साड़ी की बुनाई और उस पर होने वाली कारीगरी से रूबरू कराया। डिजाइन ग्राफ पेपर दिखाते हुए बताया कि इसके अनुरूप एक साड़ी तैयार करने में 15 दिन लग जाते हैं।
बता दें कि शिल्प के मामले में फ्रांस भी भारत की ही तरह बेहद समृद्ध है। वहां बुनकरी काफी विकसित है। ब्रिकिटी मैक्रों ने साड़ी और कालीन तैयार करने के लाइव डेमो के फोटो भी खींचे।
अंगवस्त्रम् किया भेंट
बड़ालालपुर स्थित हस्तकला संकुल में मोदी और मैक्रों
- फोटो : twitter
प्रधानमंत्री मोदी को डीरेका ग्राउंड पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें अंगवस्त्रम् दिया। इस अंगवस्त्रम् पर गीता के श्लोक ‘यदा-यदा ही धर्मस्य...’ और शंख को हथकरघा पर बुना गया है। अंगवस्त्रम् को छाही गांव के बच्चेलाल मौर्या ने संस्था ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से 15 दिन के प्रयास से कैलीग्राफी विधि से तैयार किया है।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संकुल के एंफीथिएटर में ‘चित्रकूट’ का मंचन देख फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों अभिभूत नजर आए। राजशाही अंदाज में उनके बैठने का इंतजाम था।
खास नक्काशीदार कुर्सी पर फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष, पीएम मोदी और सीएम योगी बैठे। वहीं, फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट किष्किंधाकांड के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन देख इतनी भावविभोर हो गईं कि वहीं पास में आम दर्शकों की तरह सीढ़ी पर बैठ गईं।
इस दौरान राम-हनुमान मिलन, बालि-सुग्रीव युद्ध का जीवंत मंचन हुआ। प्रधानमंत्री मोदी फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष को इन कथा प्रसंगों के जरिए रामायण की महत्ता बताते रहे। तकरीबन पांच मिनट तक उन्होंने मंचन देखा।
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ संकुल के एंफीथिएटर में ‘चित्रकूट’ का मंचन देख फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों अभिभूत नजर आए। राजशाही अंदाज में उनके बैठने का इंतजाम था।
खास नक्काशीदार कुर्सी पर फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष, पीएम मोदी और सीएम योगी बैठे। वहीं, फ्रांस की प्रथम महिला ब्रिगिट किष्किंधाकांड के प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन देख इतनी भावविभोर हो गईं कि वहीं पास में आम दर्शकों की तरह सीढ़ी पर बैठ गईं।
इस दौरान राम-हनुमान मिलन, बालि-सुग्रीव युद्ध का जीवंत मंचन हुआ। प्रधानमंत्री मोदी फ्रांसीसी राष्ट्राध्यक्ष को इन कथा प्रसंगों के जरिए रामायण की महत्ता बताते रहे। तकरीबन पांच मिनट तक उन्होंने मंचन देखा।