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शर्मनाक : कमीशन के लिए डॉक्टर नहीं लिखते जेनेरिक दवाएं

Thu, 20 Apr 2017 06:25 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 20 Apr 2017 06:25 PM IST
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Embarrassing: Doctor Do not Write Generic Medicines for Commission
Doctor
बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियां और महंगी दवाएं... हर आम और खास को इस समस्या से रू-ब-रू होना पड़ रहा है। दूसरी तरफ डॉक्टर जेनरिक दवाएं लिखने से परहेज कर रहे हैं। निजी चिकित्सक कमीशन के चक्कर में जेनेरिक दवाइयां नहीं लिखते हैं तो सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक बाहर की दवा लिखने में कार्रवाई से डरते हैं।
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यही नहीं, जिला मुख्यालय तक के किसी भी मेडिकल स्टोर पर भी जेनरिक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। कारण, इन दवाओं का मूल्य कम होता हैै और दूकानदारों को ज्यादा मुनाफा नहीं होता है। यदि डॉक्टर जेनेरिक दवाएं लिखने लगें तो उपचार तीस से चालीस प्रतिशत तक सस्ता हो जाएगा।  
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक जुलाई, 2015 में देश भर में एक हजार से अधिक जन औषधि केंद्र खोलने की बात कही थी लेकिन डेढ़ साल बाद उनके संसदीय क्षेत्र में केवल दो केंद्र खुले। अक्तूबर, 2016 में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल के अमृत फार्मेसी की शुरुआत हुई है, डॉक्टर जेनरिक दवाएं लिखने लगे हैं।
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बीएचयू में खुले जन औषधि केंद्र को इसलिए बंद कर दिया गया, क्योंकि यहां के डॉक्टर जेनरिक दवाएं नहीं लिख रहे थे। अमृत फार्मेसी के माध्यम से कैंसर, हृदय रोग समेत सभी दवाएं 20 से 80 फीसदी छूट पर मिल रही हैं। 


दरअसल, दवा कंपनियां जेनेरिक और ब्रांडेड दोनों दवाइयां बनाती हैं। दोनों की कंपोजीशन समान होती है। गुणवत्ता में भी खास अंतर नहीं होता है। बस, जेनेरिक दवाओं की मार्केंटिंग और ब्रांडिंग पर दवा कंपनियां बहुत खर्च नहीं करतीं। ब्रांडेंड दवाओं का प्रचार-प्रसार खूब होता है।

दवा कंपनियों की ओर से एमआर के माध्यम से डॉक्टरों को मंहगी दवाएं लिखने के लिए कमीशन व गिफ्ट का प्रलोभन दिया जाता है। डॉक्टरों के लालच के कारण दस गुना सस्ती जेनरिक दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंच पाती हैं।
 

बीएचयू ओपीडी से पकड़े गए नौ एमआर 

Embarrassing: Doctor Do not Write Generic Medicines for Commission
बीएचयू - फोटो : अमर उजाला
शहर के निजी से लेकर सरकारी अस्पतालों में दवा कंपनियों के मेडिकल रिप्रजेंटेटिव ओपीडी के समय में डॉक्टरों के पास जाकर अपनी-अपनी कंपनी की ब्रांडेड दवाएं लिखने के लिए प्रेरित करते हैं। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी से बुधवार को नौ एमआर पकड़े गए।

कुछ छात्रों की शिकायत पर सुरक्षाकर्मी इन्हें पकड़कर चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय ले गए, जहां पर उन्हें चेतावनी और लिखित माफीनामे के बाद छोड़ दिया गया। इन सभी की फोटो भी ली गई, ताकि वो दुबारा परिसर में नजर न आएं।

एमएस डॉ. ओपी उपाध्याय के अनुसार सुबह नौ बजे दो और दोपहर 12 बजे सात एमआर पकड़े गए। नियमों के अनुसार एमआर केवल शनिवार को चिकित्सक से आईएमएस में उनके चैंबर में ओपीडी के बाद ही मिल सकते हैं। 

मरीजों का राहत दे रहा प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
 शिवाला स्थित माता आनंदमयी आश्रम गेट पर खुले प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से रोजाना सौ से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं। यहां आनंदमयी अस्पताल के अलावा बाहर के अस्पतालों में भी इलाज कराने वाले लोग दवा ले सकते हैं। जरूरतमंदों को उचित मूल्य पर जेनरिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जल्द ही और अस्पतालों के समीप या उनके परिसर में ऐसे केंद्र खोले जाएंगे। 
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