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ई-विलेज की राह पर लमही
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 19 Jul 2015 02:21 AM IST
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अब किसी होरी, धनिया, घीसू, माधो को सरकारी दस्तावेज के लिए तहसील और कलक्ट्रेट का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। इन पात्रों के रचयिता मुंशी प्रेमचंद का गांव लमही अब ई-विलेज हो गया है और पंचायत भवन से ही जरूरी दस्तावेज जारी होने लगे हैं। यह तो तय है कि लमही मुंशी प्रेमचंद के जन्म से पहले से ही आबाद है, लेकिन गांव का जन्मदिन अब मुंशी प्रेमचंद की जयंती 31 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन गांव के बुजुर्ग व्यक्ति के हाथों केक कटवाया जाएगा।
मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में मेला लगता है। साहित्यकार, रंगकर्मी, गायक जुटते हैं और उत्सव मनाते हैं। अबकी बार गांव में बहुत कुछ नया और बेहतर हुआ है। लंबी प्रतीक्षा के बाद गांव में मुंशी प्रेमचंद शोध एवं अध्ययन केंद्र की इमारत बनकर तैयार हो गई है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने अपनी ई-विलेज योजना के तहत इस गांव का चयन किया गया था और केंद्र सरकार ने जब ई-विलेज की सूची जारी की तो उसमें सूबे का इकलौता गांव लमही ही शामिल हुआ। योजना के तहत कलम के सिपाही के ई-विलेज लमही का हर दस्तावेज ऑनलाइन किया जाएगा।
हर परिवार का पूरा विवरण डाटा बैंक में होगा। आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र हो या खसरा-खतौनी, इनके लिए कचहरी का चक्कर नहीं काटना होगा। सब ग्राम पंचायत भवन से ही मिलेगा। इसके लिए वहां जाकर सिर्फ अपना नाम बताना होगा और तुरंत सारा विवरण प्रिंट करके और हस्ताक्षर करके तत्काल उपलब्ध करा दिया जाएगा। पूर्व ग्राम प्रधान संतोष कुमार सिंह कहना है कि योजना की शुरुआत हो चुकी है लेकिन गांव अभी पूरी तरह ई-विलेज नहीं हुआ है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र और कुटुंब रजिस्टर की प्रति मुहैया कराई जा रही है लेकिन राशन कार्ड, पैनकार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाया है।
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ई-विलेज योजना के नोडल अधिकारी और एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय बताते हैं कि फिलहाल ग्रामीणों को सहज जनसेवा केंद्र के जरिए सीमित सुविधाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जा रही हैं। धीरे-धीरे सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। डिजिटल इंडिया के तहत ग्राम पंचायत में ब्राड बैंड की सुविधा मुहैया हो जाने के बाद यह सब आसान हो जाएगा। आदर्श ग्राम लमही को वर्ष 2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण गौरव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। ग्राम प्रधान मीरा देवी कहती हैं कि विकास उनकी पहली प्राथमिकता है लेकिन पंचायत के फंड से सारा काम नहीं हो सकता है। सांसद निधि, विधायक निधि और क्षेत्र पंचायत से भी कुछ काम हो जाएं तो गांव में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर लमही में मेला लगता है। साहित्यकार, रंगकर्मी, गायक जुटते हैं और उत्सव मनाते हैं। अबकी बार गांव में बहुत कुछ नया और बेहतर हुआ है। लंबी प्रतीक्षा के बाद गांव में मुंशी प्रेमचंद शोध एवं अध्ययन केंद्र की इमारत बनकर तैयार हो गई है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने अपनी ई-विलेज योजना के तहत इस गांव का चयन किया गया था और केंद्र सरकार ने जब ई-विलेज की सूची जारी की तो उसमें सूबे का इकलौता गांव लमही ही शामिल हुआ। योजना के तहत कलम के सिपाही के ई-विलेज लमही का हर दस्तावेज ऑनलाइन किया जाएगा।
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हर परिवार का पूरा विवरण डाटा बैंक में होगा। आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र हो या खसरा-खतौनी, इनके लिए कचहरी का चक्कर नहीं काटना होगा। सब ग्राम पंचायत भवन से ही मिलेगा। इसके लिए वहां जाकर सिर्फ अपना नाम बताना होगा और तुरंत सारा विवरण प्रिंट करके और हस्ताक्षर करके तत्काल उपलब्ध करा दिया जाएगा। पूर्व ग्राम प्रधान संतोष कुमार सिंह कहना है कि योजना की शुरुआत हो चुकी है लेकिन गांव अभी पूरी तरह ई-विलेज नहीं हुआ है। जन्म-मृत्यु पंजीकरण आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र और कुटुंब रजिस्टर की प्रति मुहैया कराई जा रही है लेकिन राशन कार्ड, पैनकार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराना संभव नहीं हो पाया है।
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ई-विलेज योजना के नोडल अधिकारी और एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय बताते हैं कि फिलहाल ग्रामीणों को सहज जनसेवा केंद्र के जरिए सीमित सुविधाएं ऑनलाइन मुहैया कराई जा रही हैं। धीरे-धीरे सुविधाओं का दायरा बढ़ाया जाएगा। डिजिटल इंडिया के तहत ग्राम पंचायत में ब्राड बैंड की सुविधा मुहैया हो जाने के बाद यह सब आसान हो जाएगा। आदर्श ग्राम लमही को वर्ष 2014 में राष्ट्रीय ग्रामीण गौरव पुरस्कार प्राप्त हुआ था। ग्राम प्रधान मीरा देवी कहती हैं कि विकास उनकी पहली प्राथमिकता है लेकिन पंचायत के फंड से सारा काम नहीं हो सकता है। सांसद निधि, विधायक निधि और क्षेत्र पंचायत से भी कुछ काम हो जाएं तो गांव में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।