वाराणसी के डीआरडीओ अस्पताल में सुधर रही व्यवस्था, लेवल 2 में भर्ती शुरू होने से मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत
बीएचयू एंफीथिएटर मैदान में बने 750 बेड के अस्थाई अस्पताल में अभी 250 बेड का आईसीयू चल रहा है, जबकि बहुत जल्द ही लेवल टू यानी ऑक्सीजन बेड वाले 250 अन्य मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
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वाराणसी के बीएचयू स्थित डीआरडीओ अस्पताल ( पंडित राजन मिश्र चिकित्सालय) में अब धीरे-धीरे व्यवस्था में सुधार होता दिख रहा है। पिछले दिनों मरीजों के परिजनों को इलाज के बारे में जानकारी लेने के लिए परेशान होना पड़ता था, वहीं अब परिसर में जगह-जगह हेल्पलाइन नंबर का डिस्प्ले बोर्ड लगा दिया गया है।
इस पर दिए नंबर के माध्यम से परिजन सेहत की जानकारी कर रहे हैं। बीएचयू एंफीथिएटर मैदान में बने 750 बेड के अस्थाई अस्पताल में अभी 250 बेड का आईसीयू चल रहा है, जबकि बहुत जल्द ही लेवल टू यानी ऑक्सीजन बेड वाले 250 अन्य मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी।
डीआरडीओ अस्पताल में लेबल 2 यानी 250 बेड के ऑक्सीजन वाले बेड पर भर्ती शुरू होने से निजी अस्पतालों और सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को राहत होगी। निजी अस्पतालों में महंगे दाम पर अपना इलाज कराने के बजाय मरीज अब डीआरडीओ के अस्पताल में अपना निशुल्क इलाज करा सकेंगे।
इन नंबरों पर मिलेगी सेहत की जानकारी
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि पंडित राजन मिश्र चिकित्सालय में हेल्पलाइन नंबर का डिसप्ले करा दिया गया है। परिजनों को पूरी जानकारी दिलाई जा रही है। भर्ती मरीजों की सहूलियत के लिए सभी संभव प्रयास किये जा रहे हैं।
इन नंबरों पर मिलेगी सेहत की जानकारी
7307422096
7307429705
7307420579
डीआरडीओ अस्पताल में हो रही मौतों पर संज्ञान ले सरकार
कांग्रेस नेता अजय राय ने कहा कि डीआरडीओ अस्पताल में हो रही मौतों पर सरकार तत्काल संज्ञान ले और व्यवस्था में सुधार करे। डीआरडीओ अस्पताल में मौत के आंकड़े लगातार सोशल मीडिया की सुर्खियों में हैं। ऐसे में सरकार को चेतना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं निरीक्षण कर गए थे। उसके बाद भी अगर व्यवस्था ठीक नहीं है तो यह चिंता का विषय है। हाईकोर्ट द्वारा भी उत्तर प्रदेश सरकार को चेताया जा रहा है। लेकिन सरकार हिदायत को दरकिनार कर रही है। पूरे प्रदेश की स्थिति दयनीय है।
टीकाकरण में लोग लगातार अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं। गांव में जांच नहीं हो रही है। गंगा किनारे शव हैं। सरकार अंतिम संस्कार के बजाए शवों को जमींदोज कर अपनी नाकामी छुपा रही है। कोरोना का यह भयावह रूप प्रदेश सरकार की कुनीतियों की वजह से है। हर आंसू की कीमत चुकानी होगी। ऐसे में खुद की पीठ थपथपाने से अच्छा है कि जनमानस के बीच सुचारु व्यवस्था हो और मरीजों, अस्पतालों की व्यवस्था में पारदर्शिता हो।