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नालों को जल्द से जल्द किया जाए बंद, बढ़ाएं जलप्रवाह

Sat, 12 Jun 2021 01:51 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jun 2021 01:51 AM IST
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Drains should be closed as soon as possible, increase water flow
गंगा में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए गंगा में गिरने वाले सभी नालों को जल्द से जल्द बंद करना होगा। अपस्ट्रीम में पानी की कमी के कारण प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ी है। डीएम की ओर से गठित पांच सदस्यीय टीम ने शुक्रवार की देर शाम को जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
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शुक्रवार को जिलाधिकारी को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में गंगा के प्रदूषण को कम करने के लिए सुझाव के साथ ही क ई सिफारिशें की गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गंगा में अस्सी से राजघाट के बीच जितने भी नाले गिर रहे हैं उनको तत्काल बंद कराया जाए। इसमें अस्सी, नगवां और रामनगर की ओर से बहने वाले नाले गंगा में प्रदूषण बढ़ाने के सबसे बड़े कारक हैं। इसके साथ ही रामनगर, रमना और नगवां एसटीपी को जल्द से जल्द चालू कराया जाए। अपस्ट्रीम में पानी की कमी होने के कारण गंगा की अविरलता प्रभावित हुई है। इसके कारण ही गंगा में फास्फोरस व नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ी है। अस्सी घाट पर जेटी के कारण शैवाल की मात्रा वहां पर सबसे अधिक मिली है। प्रवाह बाधित होने से पानी का रंग सबसे ज्यादा अस्सी से तुलसीघाट तक हरा हो चुका है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर बीएचयू को गंगाजल की जांच के लिए अधिकृत किया गया है। समिति ने गंगा में प्रवाह बढ़ाने की भी सिफारिश की है।
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गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी
वाराणसी। गंगा के जलस्तर में पिछले 24 घंटे में 10 सेंटीमीटर की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर 58.31 मीटर दर्ज किया गया। इसके पहले गंगा का जलस्तर चार जून को 58 मीटर था और सात जून को इसमें 21 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई और यह 58.21 मीटर तक पहुंच गया था। गंगा में प्रवाह बढ़ने के कारण फास्फोरस और नाइट्रोजन की मात्रा में अब धीरे-धीरे कमी आने लगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी कालिका सिंह ने बताया कि गंगा में पानी का प्रवाह बढ़ा है। इसके कारण शैवाल तथा फास्फोरस व नाइट्रोजन में कमी दर्ज की गई है।
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