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काशी विश्वनाथ दरबार के गर्भगृह के दरवाजों पर नजर नहीं आएगा दानदाताओं के नाम
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:24 PM IST
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
- फोटो : amar ujala
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में लगाए दरवाजों पर लिखे गए दानदाताओं के नाम अब हटेंगे। दो दिनों के अंदर मंदिर प्रशासन की ओर से कुंभाभिषेकम से पूर्व लगवाए गए दो रजत मंडित द्वार और चौखट हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके साथ ही दोनों द्वार पर अंकित किए गए यजमानों के नाम भी मिटाए जाएंगे। विशेषज्ञों की टीम इस कार्य को अंजाम देगी।
श्री काशी विश्वनाथ न्यास परिषद की 95वीं बैठक में बदले गए दरवाजों पर दानदाताओं एस सुब्बु सुंदरम और इफको द्वारा नाम लिखवाने पर चर्चा की गई थी। न्यास परिषद के अध्यक्ष ने इसे मंदिर की परंपराओं के खिलाफ बताया था। इसके मद्देनजर न्यास परिषद ने दरवाजों पर लिखवाए गए नाम हटवाने का निर्णय लिया था।
मंदिर के गर्भगृह में दक्षिण भारत के दानदाता एस सुब्बु सुंदरम ने उत्तरी द्वार को रजत मंडित कराया था। वहीं इफको ने पूर्वी द्वार पर अपनी कंपनी का नाम अंकित कराया था। बताया जा रहा है कि मंदिर के दरवाजे लगाए जाने के चार महीने के अंदर ही रंग बदलने लगे थे।
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि दोनों दरवाजों पर अंकित कराए गए नाम को दो दिन के अंदर हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंदिर के दोनों द्वार को उनके मूल स्वरूप में स्थापित कराया जाएगा।
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श्री काशी विश्वनाथ न्यास परिषद की 95वीं बैठक में बदले गए दरवाजों पर दानदाताओं एस सुब्बु सुंदरम और इफको द्वारा नाम लिखवाने पर चर्चा की गई थी। न्यास परिषद के अध्यक्ष ने इसे मंदिर की परंपराओं के खिलाफ बताया था। इसके मद्देनजर न्यास परिषद ने दरवाजों पर लिखवाए गए नाम हटवाने का निर्णय लिया था।
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मंदिर के गर्भगृह में दक्षिण भारत के दानदाता एस सुब्बु सुंदरम ने उत्तरी द्वार को रजत मंडित कराया था। वहीं इफको ने पूर्वी द्वार पर अपनी कंपनी का नाम अंकित कराया था। बताया जा रहा है कि मंदिर के दरवाजे लगाए जाने के चार महीने के अंदर ही रंग बदलने लगे थे।
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मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि दोनों दरवाजों पर अंकित कराए गए नाम को दो दिन के अंदर हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंदिर के दोनों द्वार को उनके मूल स्वरूप में स्थापित कराया जाएगा।
मंदिर विस्तारीकरण के लिए दुकानदारों से भरवाया जा रहा फार्म!
मंदिर प्रशासन ने ऐसे किसी भी आवेदन से किया इंकार
- फोटो : amar ujala
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में दुकानदारों के बीच मंदिर विस्तारीकरण के समर्थन के लिए सहमति पत्र भरवाया जा रहा है। प्रपत्र में अपनी दुकान अथवा किराएदारी वाले हिस्से को देकर उसके बदले में दुकान या धनराशि देने की मांग शामिल है। दुकानदारों का कहना है कि मंदिर प्रशासन की ओर से यह पत्र भरवाया जा रहा है लेकिन मंदिर प्रशासन के अधिकारी इस बात से इंकार कर रहे हैं।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना के तहत प्रस्तावित गंगा पाथवे योजना के लिए कुछ लोगों द्वारा दुकानदारों से समर्थन प्रपत्र भरवाया जा रहा है। दुकानदारों की मानें तो अभी तक डेढ़ सौ से अधिक लोगों द्वारा यह प्रपत्र भरा जा चुका है।
उनका कहना है कि काशी विकास समिति के लोगों द्वारा यह प्रपत्र भरवाया जा रहा है। दुकानदारों के बीच बांटे गए प्रपत्र में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि दुकान के बदले कहां दुकान दी जाएगी।
इस संदर्भ में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि मंदिर प्रशासन की ओर से कोई प्रपत्र नहीं भरवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन के निर्णय के अनुसार ही विस्थापन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दुकानदारों को किसी के भ्रम में नहीं आना चाहिए।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर विस्तारीकरण योजना के तहत प्रस्तावित गंगा पाथवे योजना के लिए कुछ लोगों द्वारा दुकानदारों से समर्थन प्रपत्र भरवाया जा रहा है। दुकानदारों की मानें तो अभी तक डेढ़ सौ से अधिक लोगों द्वारा यह प्रपत्र भरा जा चुका है।
उनका कहना है कि काशी विकास समिति के लोगों द्वारा यह प्रपत्र भरवाया जा रहा है। दुकानदारों के बीच बांटे गए प्रपत्र में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि दुकान के बदले कहां दुकान दी जाएगी।
इस संदर्भ में काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि मंदिर प्रशासन की ओर से कोई प्रपत्र नहीं भरवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन के निर्णय के अनुसार ही विस्थापन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दुकानदारों को किसी के भ्रम में नहीं आना चाहिए।