BHU के डाॅक्टरों ने किया कमाल : बोलने-सुनने लगीं जुड़वा बहनें, दो भाईयों को भी मिली राहत; जानें पूरा मामला
Varanasi News : बलिया की रहने वाली बहनें आठ साल से परेशान थीं। वहीं दो युवकों को भी इलाज किया गया है। उनको भी सुनने और बोलने में दिक्कतें आ रही थीं। इलाज के बाद बच्चों के ठीक हो जाने पर उनके परिजनों ने डाॅक्टरों का आभार जताया है।
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बलिया निवासी 16 वर्षीय दो जुड़वा बहनों को जन्म के आठ बाद से बोलना और सुनना कम हो गया। परिजनों ने बहुत प्रयास किया लेकिन दोनों बहनों की परेशानी दूर नहीं हुई। इस बीच बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट की ओपीडी में परिजन दिखाने आए। यहां डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच की तो पता चला कि वह लंबे समय से बोलने, सुनने की क्षमता नहीं है।
इसके बाद दोनों को कॉकलियर इंप्लांट लगाने का निर्णय लिया। सर्जरी कर दोनों बहनों को इंप्लांट लगाया गया। अब दोनों के अंदर बोलने, सुनने की क्षमता लौट आई। अब आठ साल बाद दोनों पहले की तरह सुन और बोल पा रही हैं। विभाग में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ से दोनों बहनों ने बातचीत भी की।
आईएमएस बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट में वाराणसी सहित आसपास के जिलों के साथ ही बिहार,झारखंड तक के मरीज यहां नाक, कान, गला संबंधी सामान्य बीमारी के मरीज आते हैं। विभाग के प्रोफेसर विश्वंभर सिंह का कहना है कि बलिया निवासी 16 वर्षीय दो बहनें जन्म के बाद करीब आठ साल तक तो सहीं से बोल-सुन पा रही थी लेकिन इसके बाद उनकी बोलने-सुनने की क्षमता बिल्कुल गायब हो गई।
विभाग में सरकारी सहायता से कॉकलियर इंप्लांट लगाया गया था। पिछले छह माह से हर महीने विभाग में बुलाकर बात करने और सुनने की ट्रेनिंग दी रही है। पिछले सप्ताह विभाग में ट्रेनिंग के लिए आई दोनों बहनों से जब बातचीत की गई तो वह न केवल सामान्य लोगों की तरह बोल रही थी बल्कि सुनने की क्षमता भी पूरी लौट आई। डॉक्टर के अनुसार अब वह स्कूल जाकर अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकेंगी।
16 साल बाद युवक की लौटी आवाज, सुनाई भी दे रहा
गाजीपुर निवासी दो सगे भाईयों में भी देखने को मिली। बड़े भाई की उम्र 28 जबकि छोटे की उम्र 18 साल है। दोनों भाईयों को इलाज के लिए उनकी बहन बीएचयू ईएनटी डिपार्टमेंट में लेकर आई। प्रो. विश्वंभर सिंह का कहना है कि इसी सप्ताह बुधवार को बड़े भाई को इप्लांट लगाया गया।
बहन ने बताया कि 12 साल बाद से ही भाई की सुनने-बोलने की क्षमता गायब हो गई। धीरे धीरे उसकी खोई क्षमता वापस आ रही है। फिलहाल वह बीएचयू में अभी भर्ती रहेगा। अगले सप्ताह बुधवार को छोटे भाई की सर्जरी कर उसको भी इंप्लांट लगाया जाएगा। इसकी समस्या जन्म के 5 साल बाद से होने लगी।
अनुवांशिकी होती है ये समस्याएं, अध्ययन की है तैयारी
प्रो.विश्वंभर के अनुसार इस प्रक्रिया में विभाग के प्रो. राजेश कुमार के साथ ही डॉ. रामराज यादव, डॉ. जेफरी, डॉ. विवेक, डॉ. सृष्टि सहित अन्य लोगों का भी पूरा सहयोग रहा। इस तरह की समस्या में सरकार की ओर से भी सहायता धनराशि दी जाती हैं। इसके लिए परिजनों को जानकारी देने के साथ ही उनकी कागजी कार्रवाई भी पूरी करवाई जाती है।
कहा कि अभी तक विभाग में करीब 200 से अधिक लोगों को इंपलांट लगाया जा चुका है। अधिकांश लोगों में अनुवांशिक वजह से ही इस तरह की समस्याएं देखने को मिली है। बच्चों से लेकर बड़ों तक होने वाली इस बीमारी के सही कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन करने की तैयारी है। इस दिशा में भी कार्रवाई शुरू हो गई है।