दीपावली: 20 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा पर्व, नहीं है तिथि का भ्रम; संस्कृत विवि के ज्योतिष विभाग ने लगाई मुहर
Diwali 2025: दीपावली को लेकर इस बार कोई भ्रम नहीं है। 20 अक्तूबर को ही दीपोत्सव मनाई जाएगी। संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग ने इसको लेकर अपना बयान जारी कर दिया है।
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Varanasi News: देश भर में दीपावली का महापर्व 20 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा। इसकी तिथि पर किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है। दीपोत्सव का समय कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी से शुक्लपक्ष की द्वितीया तक पांच दिन का माना गया है। निर्णय सिंधु तथा कालमाधव दोनों ग्रंथों में इस पर्व की काल सीमा स्पष्ट की गई है। त्रयोदशी तिथि का मान अधिक होने के कारण पंचदीपोत्सव छह दिनों का होगा।
उक्त बातें ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल व सह आचार्य डॉ. मधुसूदन मिश्र ने व्यक्त किए। निर्णयसिंधु के अनुसार कार्तिककृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी, अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन, प्रतिपदा पर बलिपूजा, द्वितीया पर भैयादूज के साथ ही पंचदीपोत्सव का समापन होता है।
वहीं कालमाधव के अनुसार दीपावली की अमावस्या रात्रि में स्थित होने पर ही ल्रक्ष्मीपूजन शुभ फलदायिनी होता है। यदि दिन में अमावस्या हो और रात्रि में शुक्ल प्रतिपदा लग जाए तो पूजन निषिद्ध होता है। 20 अक्तूबर को सूर्यास्त के बाद दो घंटा 32 मिनट अर्थात 152 मिनट का प्रदोषकाल है।
नहीं रहेगा भ्रम
सभी धर्मग्रंथों के अनुसार पूरे भारतवर्ष में सौर दृक ब्राह्म गणनाओं से प्रदोषकाल व्यापिनी अमावस्या केवल 20 अक्तूबर को होने से दीपावली 20 अक्तूबर को ही श्रेयस्कर है। कुछ दृक पंचांगों ने 21 अक्तूबर को भी दीपावली लिखी है, जिससे दृक पक्षीय पंचांगकारों और आमजन में विसंगति व्याप्त है।
21 अक्तूबर को भारत के भूभाग अरुणाचल प्रदेश के डांग क्षेत्र में भी सूर्यास्त बाद पूर्ण प्रदोषकाल में अमावस्या व्याप्त नहीं है। दूसरे दिन अंतिम स्पर्श मात्र कर्मकाल में पारणादि सभी कार्य संभव नहीं है अत ग्राह्य नहीं है। अर्थात जिस दिन सूर्यास्त से पूर्व अमावस्या हो और तीन मुहूर्त बाद तक भी अमावस्या रहे उस दिन दीपावली होगी। ऐसी स्थिति 20 अक्तूबर को ही बन रही है।
पितरों की दीपावली की रात मशाल जलाकर करें मार्ग प्रशस्त
शास्त्रों की मान्यता है कि हमारे दिवंगत पितर कनागतों के पहले दिन प्रौष्ठपदी पूर्णिमा को पितृलोक से मृत्युलोक में आते हैं और दीपावली की रात उल्काओं की रोशनी देखते हुए पितरलोक को प्रस्थान करते हैं। इसलिए अपने-अपने पितरों को दीपावली की रात मशाल जलाकर ऊपर आसमान की ओर दिखाते हुए उनका मार्ग प्रशस्त करें अर्थात सम्मान से विदा करें।
यह कर्म छोटी दीपावली अर्थात चतुर्दशी की रात्रि में अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से बड़े से बड़ा पितृदोष शांत हो जाता है। प्रो. शुक्ल ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित महामहोपाध्याय बापूदेव दृकसिद्ध पंचांग के अनुसार 20 अक्तूबर को लक्ष्मी पूजा होगी।
दीपावली की तारीखें
- धन त्रयोदशी - 18 अक्तूबर
- नरक चतुर्दशी - 19 अक्तूबर
- दीपावली लक्ष्मीपूजा - 20 अक्तूबर
- अष्टमी व गोवर्धन पूजा - 22 अक्तूबर
- भाई दूज - 23 अक्तूबर
- प्रदोष काल: सायं 05:25 से 07:49 रात
- वृश्चिक लग्न: 06:54 से 08:50 रात
- सिंह लग्न: 01:22 से 03:37 रात