फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Diwali 2022 Mantras continued during Mahanisha kaal Tantra Vidya in secluded places in Kashi

Diwali 2022: महानिशा काल में सिद्ध होते रहे मंत्र, काशी में एकांत स्थानों पर परवान चढ़ती रही तंत्र विद्या

Tue, 25 Oct 2022 01:08 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Tue, 25 Oct 2022 01:08 PM IST
सार

दिवाली की रात महानिशा काल में मां कालरात्रि की विशेष पूजा संपन्न हुई। गुप्त विद्याओं को जगाने के लिए काशी के महाश्मशान में महानिशा काल में साधकों के पहुंचने का क्रम जारी रहा। 

विज्ञापन
Diwali 2022 Mantras continued during Mahanisha kaal Tantra Vidya in secluded places in Kashi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Demo pic

विस्तार

दिवाली की रात महानिशा काल में मंत्र सिद्ध होते रहे और तंत्र विद्या परवान चढ़ती रही। लोहबान और गुग्गुल की गंध के बीच तंत्र साधकों ने यज्ञ कुंड में मंत्रों की आहुतियां अर्पित कीं। निर्विघ्न रूप से तंत्र साधना को संपन्न करने के लिए एकांत और निर्जन स्थानों पर साधकों ने तंत्र विद्या के अनुष्ठान संपन्न किए।

विज्ञापन


योगिनी, महाकाली और गुरु मंत्रों को सिद्ध करने का क्रम अनवरत जारी रहा। बलि चढ़ाने के दौरान रोकटोक से बचने के लिए कई जतन किए गए। सोमवार को दीपावली की रात मां कालरात्रि की विशेष पूजा संपन्न हुई। गुप्त विद्याओं को जगाने के लिए काशी के महाश्मशान में महानिशा काल में साधकों के पहुंचने का क्रम जारी रहा।

विज्ञापन

कालरात्रि को प्रसन्न करने को सात्विक और तामसिक बलि 

मध्यरात्रि में कुछ साधकों ने सात्विक ओर कुछ ने तामसी बलि दी। सात्विक बलि में नींबू, कोहड़ा, नारियल की बलि देकर इष्टदेव को प्रसन्न किया गया जबकि तामसी बलि में मुर्गा, बकरा, शराब, उल्लू आदि की बलि चढ़ाकर इष्टदेव को प्रसन्न किया गया। तंत्र-मंत्र का सामान बेचने वाले दुकानदारों की मानें तो महानिशा की रात में उल्लू की हड्डी से भी साधना की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

तांत्रिकों की मानें तो दीपावली की पूजा-लक्ष्मी गणेश की समर्पित है। देवी लक्ष्मी की सवारी उल्लू है, इस नाते पूजा में उल्लू का विशेष महत्व होता है। वहीं गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण साधकों को निर्जन स्थान की तलाश में काफी मशक्कत करनी पड़ी। गंगा पार रेती जलमग्न होने के कारण साधकों को एकांत व निर्जन स्थान चिन्हित करने में परेशानी हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed