आपदा को अवसर में बदला, कोरोना काल में कोराबार को लगाए पंख, बन गए दूसरों के लिए एक नजीर
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एक सामान्य तरीके से चल रही जिंदगी में कोरोना ने ऐसा बदलाव लाया कि कई लोग आपदा में भी अवसर तलाश लिए। किसी ने अपना उद्योग स्थापित किया तो कोई बाहर प्राइवेट जॉब छोड़कर अपना खुद का कारोबार शुरू किया और आज के समय में ठीक ठाक स्थिति में है। उद्यमी, युवा व्यापारी, खेल प्रशिक्षक और अन्य कई ऐसे कारोबारियों ने अपना व्यवसाय तक बदल दिया। ऐसा भी नहीं कि व्यवसाय बदलने से उन्हें कोई नुकसान पहुंचा बल्कि और बेहतर तरीके से ही काम कर रहे और दूसरों के लिए एक नजीर भी बने हुए हैं।
दो दोस्तों ने खोला खुद का सुपर मार्केट
काशी विद्यापीठ ब्लाक के रमना गांव के रहने वाले दो दोस्त संतोष और राजेश ने एक साथ एमएससी की पढ़ाई की। इसी बीच कुछ नया और अलग करने की ठानकर गांव में ही सुपर मार्केट खोल दिया। कोरोना काल में यह कारोबार खूब रफ्तार पकड़ा। दुकान में जनरल स्टोर के साथ ही रेडीमेड के सामान भरे हैं। आज के समय में दो दोस्तों की जोड़ी और कार्यक्षमता गांव के युवाओं के लिए नजीर है कि गांव में ही रहकर अच्छा व्यापार किया जा सकता है। लॉक डाउन में भी इनकी आमदनी कम नही हुई है। इनके सुपर मार्केट की देन है कि आसपास गांव में भी ऐसे ही आधा दर्जन दुकानें खुल चुकी हैं।
खो-खो प्रशिक्षक थे, अब कुशल कारीगर बन गए
लॉकडाउन ने कई लोगों का रोजगार छीना तो कईयों को नई राह भी दिखाई। उसी कड़ी से जुड़े हुए हैं बिर्दोपुर के रहने वाले 40 वर्षीय खोखो प्रशिक्षक अनिरुद्ध सिंह। जब खेलकूद पर विराम लग गया और जीविका कोई साधन नहीं बचा तो अनिरूद्ध ने खुद के हुनर को एक नई पहचान दी। परिवार के 6 सदस्यों के जीविका का भार उठाने वाले अनिरूद्ध तनिक भी नहीं ठगमगाए और बिजली उपकरण और मरम्मत का कारोबार शुरू किया। वर्तमान में ठीक ठाक आमदनी कर ले रहे हैं और परिवार भी सुख चैन से है। शुरूआती दौर में दिक्कतें जरूर आई लेकिन मुसीबतों का सामना भी डटकर किया। कुशल कारीगर के भूमिका में अब जाने जाते हैं।
मछली पालन से परिवार का कर रहे भरण पोषण
कोरोना से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिंदगी कुछ ऐसी भी करवट ले सकती है। हालांकि कोरोना ने लोगों को यह भी एहसास करा दिया कि कुछ भी स्थिर नहीं रहने वाला है। खुद को मजबूती से स्थापित करना बेहद जरूरी है। ऐसे में कबड्डी कोच की भूमिका में रहने वाले प्रशिक्षक धीरज प्रसाद ने भी कुछ नया और अलग करने की ठानी। दोस्तों के सहयोग से मछली पालन शुरू किया और वर्तमान समय में जबरदस्त मुनाफा कमा रहे हैं। दर्जनों महिला खिलाडिय़ों को राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने वाले धीरज कुमार अपने पुश्तैनी डेढ़ एकड़ की तालाब में मछली पालन करते हैं। शुरूआत में दिक्कत आई लेकिन घबराए नहीं। मंडुवाडीह के यशोदा नगर के रहने वाले धीरज की तरह अन्य युवा भी मछली पालन में अपनी भागीदारी बढ़ा रहे हैं। मतलब कि एक नए रोजगार की राह धीरज ने दिखा दी।
किराना की दुकान से होम डिलिवरी तक
लॉकडाउन में जब लोग घरों में थे तो बड़ी भूमिका आसपास के जनरल स्टोर व किराना के दुकानदारों ने निभाई। उस दौरान नरिया के पांडेय मुहाल के रहने वाले शैलेंद्र कुमार यादव बच्चा ने लोगों के घर होम डिलिवरी की सुविधा शुरू की। यह लोगों को इतना पसंद आया और समय की बचत समझ में आई कि अभी भी लोग आर्डर पर सामान मंगवा रहे हैं। दरअसल, एक नये व्यापार को बढ़ावा भी मिला। बच्चा यादव अभी भी होम डिलिवरी की सुविधा दे रहे हैं। बीएचयू लंका आसपास इलाकों में डिलिवरी मैन द्वारा सामानों की सप्लाई करा रहे हैं। बताते हैं कि इसमें ठीक ठाक आमदनी हो जा रही है।