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सोनभद्रः नक्सली मुन्ना केस में डीआईजी आजमगढ़ के बयान दर्ज, 50 से अधिक सिर कलम कर फैलायी थी दहशत

Fri, 08 Jan 2021 07:55 PM IST
विचित्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: विचित्र सिंह Updated Fri, 08 Jan 2021 07:55 PM IST
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DIG Azamgarh statement recorded in Naxalite Munna case in Sonbhadra
अदालत में नक्सलियों के बारे में जानकारी देने के बाद अधिवक्ताओं के साथ आजमगढ़ के डीआईजी सुभाषचंद्र दूबे। - फोटो : अमर उजाला

अपर जनपद व सत्र न्यायाधीश प्रथम सोनभद्र जनपद की अदालत में शुक्रवार को नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा और अजीत कोल से संबंधित मुकदमे की सुनवाई हुई। वर्ष 2012 में सोनभद्र का एसपी रहने के दौरान आपरेशन चक्रव्यूह चलाकर उत्तर प्रदेश से नक्सलवाद का खात्मा करने वाले डीआईजी आजमगढ़ सुभाष दूबे ने अभियोजन साक्षी के रूप में अदालत में बयान दर्ज कराए। नक्सली ने 50 से अधिक लोगों का सिर कलम कर यूपी, बिहार, झारखंड में दहशत पैदा कर दी थी।

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अदालत को उसकी गिरफ्तारी और अपराध के बारे में जानकारी देने के साथ बचाव पक्ष के सवालों के जवाब भी दिए। मई 2012 में सोनभद्र के तत्कालीन एसपी सुभाष चंद्र दूबे की अगुवाई में चोपन थाना क्षेत्र के कनछ जंगल से राबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के कम्हारडीह गांव निवासी तीन लाख के इनामी मुन्ना विश्वकर्मा को पकड़ने में कामयाबी मिली थी। यह कामयाबी इतनी बड़ी थी कि तत्कालीन सीएम ने कुछ देर के लिए विधानसभा की कार्यवाही रोककर सदस्यों को इसकी जानकारी दी थी। आगे पढ़ें, 50 से अधिक सिर कलम कर दहशत फैलाने वाले...

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इस उपलब्धि के लिए एसपी सुभाष चंद्र दूबे को सीआरपीएफ के डीजी कमेंडेशन डिस्क से नवाजा गया था। मुन्ना ने 2009 में कोन थाना क्षेत्र के चननी में जनपंचायत लगाकर पुलिस मुखबिरी के शक में एक व्यक्ति का सिर कलम कर यूपी पुलिस को खुली चुनौती दी थी। लालव्रत, अजीत आदि के साथ 2004 से 2012 के बीच कई लैंड माइंस विस्फोट करने के साथ 50 से अधिक लोगों का सिर कलम कर यूपी, बिहार, झारखंड में दहशत पैदा कर दी थी। अजीत मुन्ना का दाहिना हाथ था। 

मुन्ना का बुलावा समझा जाता था मौत

चंदौली के हिनउत में लैंड माइंस विस्फोट कर 16 पुलिसकर्मियों की हत्या और रोहतास किले पर झंडा फहराने पर वहां के प्रधान सहित उसके परिवार के चार सदस्यों का सिर कलम कर मुन्ना ने दहशत पैदा कर दी थी। उस दौरान नक्सल प्रभावित इलाके के लोगों ने सूर्यास्त के बाद घर से निकलना बंद कर दिया था। रात में उसका बुलावा आने पर लोग समझ जाते थे कि अब वह इस दुनिया में नहीं रहने वाले हैं। परिवार के सदस्य भी इसे नियति मानकर खुद को घर की देहरी के अंदर कैद कर लेते थे। अगले दिन गांव के बाहर उस व्यक्ति की सिर कटी लाश मिलती थी। उसके पकड़े जाने के बाद सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर में जहां नक्सलवाद का खौफ समाप्त हो गया। जनपद से सटे बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश में भी स्थिति सामान्य हो गई है।

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