देवोत्थान एकादशी: काशी विश्वनाथ मंदिर में विष्णु सहस्त्रनाम से नारायण को जगाया, काशी में हुए विशेष अनुष्ठान
देवोत्थान एकादशी के अवसर पर काशी के विभिन्न स्थानों पर विशेष पूजन-अर्चन हुए। काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर छोटे-बड़े मंदिरों पर व्रती महिलाओं ने तुलसी विवाह के साथ विशेष पूजा की।
विस्तार
चार महीने की योग निद्रा पूर्ण करने के बाद भगवान श्री हरि देवोत्थान एकादशी पर जागृत हुए। श्रीहरि नारायण के जागृत होने के साथ ही विवाह को छोड़कर सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी हो गई। शनिवार को हरि प्रबोधिनी एकादशी पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान विष्णु को मंत्रोच्चार और अनुष्ठान के साथ जगाया गया।
शनिवार को देवोत्थान एकादशी पर्व की शुरुआत श्री काशी विश्वनाथ धाम में बद्रीनारायण मंदिर में मध्याह्न 12:30 बजे भगवान श्री हरिविष्णु का षोडशोपचार पूजन हुआ। मंदिर न्यास के 11ब्राह्मणों ने विष्णु सहस्त्रनाम पाठ किया। इसके उपरांत मंदिर प्रांगण स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में विग्रह का षोडशोपचार पूजन संपन्न हुआ।
इसके बाद ललिता घाट स्थित पद्मनाभ मंदिर में भगवान श्रीहरि विष्णु का षोडशोपचार पूजन एवं पुरुषसूक्त पाठ विधिवत रूप से संपन्न हुआ। सायंकाल मंदिर प्रांगण स्थित माता अन्नपूर्णा मंदिर के समीप चारों वेदों का सामूहिक वैदिक पाठ का आयोजन किया गया, जिससे संपूर्ण धाम वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनियों से गूंज उठा।
भक्ति गीतों के साथ हुई पूजा
वैदिक पाठ के उपरांत शंकराचार्य चौक स्थित शिवार्चनम मंच पर भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक संध्या की प्रथम प्रस्तुति भजन गायक प्रवीण सिंह के भगवान शिव पर आधारित भजन प्रस्तुतियों के साथ हुई। सह-कलाकार तबला वादक पंकज राय, बांसुरी वादक ऋतिक शुक्ला एवं गिटार वादक प्रियांशु मौर्य रहे। द्वितीय प्रस्तुति में पूजा बसाक एवं वर्षा बसाक (बसाक सिस्टर्स) ने अपनी युगल भजन प्रस्तुति से पूरे माहौल में भक्ति रस का संचार किया। तबले पर कृष्ण प्रजापति एवं कीबोर्ड पर शिवांश मिश्र ने संगत की।
तृतीय प्रस्तुति वागीशा पांडेय एवं हरि प्रिया पांडेय की रही। हारमोनियम पर आलोक पांडेय एवं तबले पर कन्हैया पांडेय ने संगत की। इनकी मधुर प्रस्तुतियों से संपूर्ण प्रांगण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। हरि प्रबोधिनी एकादशी के अवसर पर आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या श्रद्धा, भक्ति एवं सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक रही। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान श्रीहरि विष्णु के जागरण पर्व का उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया।
हरि प्रबोधिनी एकादशी पर पूजे गए आदिकेशव
देवोत्थान एकादशी और तुलसी विवाह के पावन अवसर पर शनिवार को नमामि गंगे ने काशी के प्राचीनतम विष्णु तीर्थ आदिकेशव मंदिर में विधिवत पूजन-अर्चन किया। भगवान श्रीहरि विष्णु के आदिकेशव स्वरूप, माता लक्ष्मी एवं माता तुलसी की भक्ति भाव से आरती उतारी गई और भारतवर्ष की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की गई। पूजन के उपरांत नमामि गंगे टीम ने आदिकेशव घाट पर स्वच्छता अभियान भी चलाया। नमामि गंगे संयोजक राजेश शुक्ला ने भगवान विष्णु से देशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और संस्कृति की रक्षा की प्रार्थना की।
बिंदुमाधव को अर्पित किया 1000 तुलसी दल
छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित बिंदु माधव मंदिर में पूर्णिमा तक चलने वाले पंच दिवसीय अनुष्ठान एकादशी से आरंभ हुए। देवोत्थान एकादशी पर शनिवार को पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में भगवान बिंदु माधव को 1008 विष्णु सहस्त्रनाम से 1000 तुलसीदल अर्पित किया गया। 18 घंटे तक चलने वाले कार्यक्रम की शुरूआत सुबह चार बजे हुई।
कार्तिक शुक्ल एकादशी यानि प्रबोधिनी एकादशी के दिन पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में सुबह चार बजे से रात्रि 10 बजे विविध धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। मंदिर के प्रधान अर्चक आचार्य मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि प्रात: 4 बजे मंगला (काकडा) आरती हुई। प्रात: 4.30 बजे मक्खन आरती हुई। प्रात: 6 बजे श्रीखंड मलाई आरती हुई जिस पर सोने का वर्क चढ़ा हुआ था।
एकादशी पर किया पहले गंगा स्नान फिर किया दान
देवोत्थान एकादशी पर शनिवार को श्रद्धालुओं ने पहले गंगा स्नान और उसके बाद दान पुण्य किया। भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही सुबह से गंगा के तट पर स्नान, दान और विष्णु मंदिरों में दर्शन पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। वहीं बाजारों में भी श्रद्धालुओं ने गन्ने, शकरकंद के साथ ही फलों की खरीदारी भी की।
शनिवार को देव प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान सूर्य की पहली किरण के साथ गंगा के तट पर श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा। भोर से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला देर शाम तक अनवरत चलता रहा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु का दर्शन पूजन किया। आदिकेशव से अस्सी घाट तक के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने भगवान श्री हरि का दर्शन पूजन किया।