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कोतवाल काल भैरव महोत्सव का चौथा दिन: जब हंसराज रघुवंशी ने गाया- मेरा भोला है भंडारी...

Sun, 13 Nov 2022 09:50 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Sun, 13 Nov 2022 09:50 AM IST
सार

शनिवार को काशी कोतवाल काल भैरव उत्सव के चौथे दिन देश विदेश के लोग खूब झूमे। मशहूर भजन गायक कलाकार हंसराज रघुवंशी ने एक से बढ़कर एक शिवमय माहौल में संगीतमय प्रस्तुतियां देकर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। मेरा भोला है भंडारी...से शुरुआत करते हुए हंसराज ने शिव समा रहे मुझमें..., शिव शंभो...सहित कई प्रस्तुतियां दीं।

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Devotees dance on the presentations of Hansraj Raghuvanshi on the fourth day of Kashi Kotwal Kaal Bhairav
हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

श्रीकृष्णगिरी पीठाधीश्वर डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि काशी की मिट्टी किसी को भक्ततो किसी को गुरु बना देती है। श्रेष्ठ पदवी का सम्मान भी दिला देती है। काशी में पांच कोस की परिधि वह स्थान है जहां ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ था। यही कारण है कि पांच कोस की इस परिधि में यमराज का प्रवेश वर्जित है। इस पांच कोस के घेरे में निवास करने वालों के प्राण हरण का दायित्व स्वयं शिव पूर्ण करते हैं। यहां के निवासियों का लेखाजोखा चित्रगुप्त नहीं कालभैरव रखते हैं। 

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शनिवार को काशी कोतवाल काल भैरव उत्सव के चौथे दिन नरिया स्थित चौधरी लॉन में प्रवचन के दौरान डॉ. बसंत विजय महाराज ने कहा कि त्रैलोक्य में ऐसी विशिष्टता वाला दूसरा कोई स्थान है ही नहीं। कहा कि जिसमें भी आगे बढ़ने की तड़प बनी रहती है वह तृप्त नहीं होता। अपनी तड़प को जिस दिन अपने आराध्य के लिए मन में पैदा कर लोगे यह मन तुम्हें ऊंचाई की ओर ले जाएगा।

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जप की महत्ता भी नहीं है कम
देशभर से जुटे भक्तों से चेतावनी के लहजे में कहा कथा तो अमृत है ही लेकिन जप की महत्ता भी कम नहीं है। काशी बड़े भाग्य से मिलती है। फिर मिले न मिले...जब तक के लिए मिली है, जितनी देर के लिए मिली है। उसे पकड़ लो, जकड़ लो और समाहित कर लो अपनी तरंगों के साथ जिनका सद्प्रभाव तुम्हें जीवन पर्यंत मिलता रहेगा।

हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु
रात्रि में मशहूर भजन गायक कलाकार हंसराज रघुवंशी ने एक से बढ़कर एक शिवमय माहौल में संगीतमय प्रस्तुतियां देकर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। मेरा भोला है भंडारी...से शुरुआत करते हुए हंसराज ने शिव समा रहे मुझमें..., शिव शंभो...सहित कई प्रस्तुतियां दीं।
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