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देव दीपावलीः दीपमालाओं की लड़ियों से काशी की धरा पर सजा तारामंडल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 05 Nov 2017 10:47 AM IST
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देव दीपावली
- फोटो : अमर उजाला
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तीनों लोक से न्यारी काशी की धरा पर शनिवार की शाम इंद्रधनुषी छटा निखर गई। गंगा का अर्धचंद्राकार किनारा दैवीय आभा से दमक उठा। सुरसरि के घाटों पर ओर से छोर तक दीपों का तारामंडल इठलाने लगा तो पूनम का चांद भी शरमा सा गया।
मौका था जग विख्यात देव दीपावली महोत्सव का। कहीं फूलों की लड़ियां सजीं तो कहीं रंगोलियां। कहीं हल्दी-चंदन से अल्पनाएं उकेरी गईं तो कहीं फुलझड़ियों की सतरंगी बौछारें उत्सव में आनंद का संचार करती रहीं।
राजघाट से अस्सी तक ऐसे ही अप्रतिम नजारों की झलक पाने के लिए काशी ही नहीं दुनिया के कई देशों के लोग उमड़ पड़े थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने कभी काशी में ऐसी ही दिवाली मनाई थी।
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अब घाट-घाट पर दीपों का ज्योतिर्मय उपहार उसी परंपरा का उत्सव बन गया है। मानो तारे जमीं पर उतर आए हों। उत्तरवाहिनी गंगा का किनारा दीपमालाओं की लड़ियों से तारामंडल सा निखर उठा। कहीं दीपों की अवलियां (पंक्तियां) तो कहीं संदेशपरक अल्पनाएं दीपों की लौ में साकार हुईं।
गंगा की मचलती लहरों पर लतरों, ध्वजा-पताकाओं और गेंदा, गुलाब के फूलों से सजे नावों-बजड़ों के झुंड इतराए तो पूर्णिमा का चांद भी हिचकोले खाता रहा। शनिवार की शाम काशी में मनाए गए दीपोत्सव का नजारा ऐसा ही रहा।
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मौका था जग विख्यात देव दीपावली महोत्सव का। कहीं फूलों की लड़ियां सजीं तो कहीं रंगोलियां। कहीं हल्दी-चंदन से अल्पनाएं उकेरी गईं तो कहीं फुलझड़ियों की सतरंगी बौछारें उत्सव में आनंद का संचार करती रहीं।
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राजघाट से अस्सी तक ऐसे ही अप्रतिम नजारों की झलक पाने के लिए काशी ही नहीं दुनिया के कई देशों के लोग उमड़ पड़े थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने कभी काशी में ऐसी ही दिवाली मनाई थी।
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अब घाट-घाट पर दीपों का ज्योतिर्मय उपहार उसी परंपरा का उत्सव बन गया है। मानो तारे जमीं पर उतर आए हों। उत्तरवाहिनी गंगा का किनारा दीपमालाओं की लड़ियों से तारामंडल सा निखर उठा। कहीं दीपों की अवलियां (पंक्तियां) तो कहीं संदेशपरक अल्पनाएं दीपों की लौ में साकार हुईं।
गंगा की मचलती लहरों पर लतरों, ध्वजा-पताकाओं और गेंदा, गुलाब के फूलों से सजे नावों-बजड़ों के झुंड इतराए तो पूर्णिमा का चांद भी हिचकोले खाता रहा। शनिवार की शाम काशी में मनाए गए दीपोत्सव का नजारा ऐसा ही रहा।
दोपहर से ही दिखने लगा असर
दीपक जलाती युवती
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर बाद ही दीपोत्सव देखने के लिए घर-घर से बच्चों, महिलाओं के साथ लोग गंगा तट की ओर चल पड़े। शाम चार बजे तक दशाश्वमेध मार्ग पैक हो गया। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट की सीढ़ियां किसी छविगृह की बालकनी की तरह आस्थावानों से खचाखच भर गईं।
उसी जन सैलाब के बीच घाट-घाट पर महिलाएं दीप सजाने उतरने लगीं। बच्चे, महिलाएं और युवा दीपों की पंक्तियां सजाने लगे। शाम 5:30 बजे से घाटों पर कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊं नम: शिवाय तो कहीं स्वच्छ भारत अभियान के स्लोगन दीपों की अल्पनाओं में प्रज्ज्वलित होने लगे।
दशाश्वमेध घाट पर इंडिया गेट की रिप्लिका के समक्ष अमर जवान ज्योति जलाई गई। शहीदों की याद में मास पर्यंत जलाए गए आकाशदीपों का समापन 39 जीटीसी के जवानों ने शौर्य धुन बजाकर किया।
ब्रिगेडियर एसए रहमान की ओर से पुष्परीथ अर्पित करने के बाद पं. चंद्रमौलि उपाध्याय के आचार्यत्व में गंगा का सविधि पूजन हुआ और फिर 21 बटुकों और 42 देव कन्याओं ने मिलकर महाआरती की।
बतौर मुख्य अतिथि गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने दीप महोत्सव को सबसे यादगार क्षण बताया। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने उन्हें अंगवस्त्रम से नवाजा।
इस मौके पर एयर कमॉडोर धार सिंह, सीआरपीएफ के कमांडेंट उदय प्रताप सिंह समेत कई आला अधिकारी उपस्थित थे। रामजनम यादव योगी के शंखनाद से गंगा का किनारा गूंजता रहा तो डमरूनाद भी तम-मन प्रफुल्लित कर गया।
उसी जन सैलाब के बीच घाट-घाट पर महिलाएं दीप सजाने उतरने लगीं। बच्चे, महिलाएं और युवा दीपों की पंक्तियां सजाने लगे। शाम 5:30 बजे से घाटों पर कहीं स्वास्तिक तो कहीं ऊं नम: शिवाय तो कहीं स्वच्छ भारत अभियान के स्लोगन दीपों की अल्पनाओं में प्रज्ज्वलित होने लगे।
दशाश्वमेध घाट पर इंडिया गेट की रिप्लिका के समक्ष अमर जवान ज्योति जलाई गई। शहीदों की याद में मास पर्यंत जलाए गए आकाशदीपों का समापन 39 जीटीसी के जवानों ने शौर्य धुन बजाकर किया।
ब्रिगेडियर एसए रहमान की ओर से पुष्परीथ अर्पित करने के बाद पं. चंद्रमौलि उपाध्याय के आचार्यत्व में गंगा का सविधि पूजन हुआ और फिर 21 बटुकों और 42 देव कन्याओं ने मिलकर महाआरती की।
बतौर मुख्य अतिथि गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदी बेन पटेल ने दीप महोत्सव को सबसे यादगार क्षण बताया। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने उन्हें अंगवस्त्रम से नवाजा।
इस मौके पर एयर कमॉडोर धार सिंह, सीआरपीएफ के कमांडेंट उदय प्रताप सिंह समेत कई आला अधिकारी उपस्थित थे। रामजनम यादव योगी के शंखनाद से गंगा का किनारा गूंजता रहा तो डमरूनाद भी तम-मन प्रफुल्लित कर गया।