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बनारस में डेंगू के डंक का कहर, चपेट में शहर और गांव, छह दिन में दो की मौत, 50 से ज्यादा भर्ती

Fri, 12 Oct 2018 01:05 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 12 Oct 2018 01:05 PM IST
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Dengue cases risees day by day in varanasi at uttar pradesh
अस्पताल में भर्ती मरीज - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में इन दिनों डेंगू का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। पिछले छह दिन में दो लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं सरकारी और निजी अस्पताल में 50 से अधिक लोग अपना इलाज करा रहे हैं। सबसे अधिक 15 मरीज दीनदयाल अस्पताल में जबकि पांच मरीज बीएचयू, 10 मंडलीय अस्पताल और 20 से अधिक मरीज रामकृष्ण मिशन अस्पताल लक्सा समेत शहर के अन्य निजी अस्पताल में भर्ती हैं।
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मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल, रामनगर अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या अधिक है। यहां डेंगू का संभावित मरीज मानकर जांच कराई जा रही है और पुष्टि होने के बाद डेंगू वार्ड में भर्ती किया जाता है। इधर छह दिन में डेंगू पीड़ित दो लोगों की मौत भी हो चुकी है।
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पढ़ें: बनारस में नहीं थम रहा डेंगू का प्रकोप, एक पुलिसकर्मी की मौत, कई अस्पताल में भर्ती
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इसमें छह अक्तूबर को बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल के आईसीयू में भर्ती तेलियाबाग निवासी महिला सरोज (20) और दस अक्तूबर को बीएचयू अस्पताल में ही भर्ती एसएसपी के हेडपेशी यशवंत सिंह यादव (57) की भी इलाज के दौरान मौत हुई। डेंगू के कारण और बचाव के बारे में जानकारी के लिए सरकारी अस्पतालों में होर्डिंग्स के साथ ही पोस्टर भी चस्पा कराए गए हैं।

उधर, शहर के अधिकांश इलाके डेंगू की चपेट में हैं और लोग इसके लिए समय से जहां फागिंग न होने की बात कह रहे हैं वहीं नगर निगम का दावा कि शहर भर में फागिंग कराई जा रही है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी एके दूबे ने बताया कि 14 मशीनों द्वारा फागिंग कराई जा रही है।

आगे मशीनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। डेंगू के चलते आईएमए सहित अन्य ब्लडबैंकों पर ब्लड के साथ ही प्लेटलेट्स की डिमांड भी बढ़ गई है। आईएमए में सामान्य दिनों में 100 यूनिट की जगह इस समय 250 से 300 यूनिट प्लेटलेट्स जा रहा है। ब्लड बैंकों से महंगे दाम पर प्लेटलेट्स दिलाने का कारोबार चल रहा है।  

रैपिड रिस्पांस टीम अलर्ट

Dengue cases risees day by day in varanasi at uttar pradesh
अस्पताल में भर्ती रोगी

डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए रैपिड रिस्पांस टीम को अलर्ट कर दिया गया है। संभावित इलाकों में कैंप लगवाकर लोगों की जांच कराने के साथ ही अस्पतालों में भर्ती लोगों के इलाज की मॉनीटरिंग करने का निर्देश दिया गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों से हर दिन रिपोर्ट भी तलब की गई है।-डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ

महमूरगंज के कृष्णानगर कालोनी में विनय कुमार पांडेय (64) को तीन दिन से बुखार था। जांच कराने पर पता चला कि प्लेटलेटस तेजी से कम हो रहा है। रिपोर्ट में डेंगू पॉजीटिव आया। अभी इनका इलाज चल ही रहा था कि इनकी पत्नी सुशीला पांडेय (60) भी डेंगू की चपेट में आ गई। उधर घर में काम करने वाली एक अन्य महिला को भी डेंगू को हो गया है।

मीरापुर बसही के श्यामपुरी कालोनी निवासी हृदयनारायन सिंह के बेटे प्रियांशु सिंह को 25 सितंबर से ही बुखार था। जब बुखार नहीं ठीक हुआ तो पांच अक्तूबर को दीनदयाल अस्पताल लाए। जांच के लिए सैंपल भेजा। इनमें डेंगू की पुष्टि हुई। बताया कि कालोनी में सीवेज सिस्टम सही न होने और फागिंग न होने से लोगों की तबीयत खराब हो रही है।

कीवी और पपीते की मांग बढ़ी

डेंगू मरीजों में प्लेटलेटस बढ़ाने में सहायक फलों की मांग भी बढ़ी है। न्यूजीलैंड से आने वाला कीवी फल पहले जहां 300 रुपये किलोग्राम मिलता था वहीं अब 400 रुपये किले बिक रहा है। ईरान से आने वाला कीवी 200 से 250 रुपये किलो की जगह 300 रुपये में बिक रहा है। लोग मुहल्लों में पपीते की पत्तियां ढूंढते रहते हैं। 30 रुपये किलो में बिकने वाला पपीता अब 50 रुपये प्रतिकिलो मिल रहा है। सिगरा के फल विक्रेता कुलदीप ने बताया कि पिछले साल एक दिन में पांच किलो कीवी बेच देता था इस साल प्रतिदिन 20 किलो तक बिक रहा है।

कीटनाशक दवा के छिड़काव के नाम पर गोलमाल

जिले में मच्छरों एवं कीट पतंगों को मारने के लिए प्रतिवर्ष ग्राम पंचायतों दवा के छिड़काव के लिए दस हजार रुपये दिए जाते हैं। लेकिन मच्छरों को मारने वाली दवा का छिड़काव कागजों पर करके करोड़ों रुपये का गोलमाल किया गया। इस मामले में एक दशक में मिलने वाले धन की उच्च स्तरीय जांच करा दी जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ जाएगा। सीएमओ भी मानते हैं कि गांवों में कम मात्रा में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाता है। 

सेवापुरी के बीडीओ सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों में दवाओं का छिड़काव नहीं किया जाता है तो यह गंभीर मामला है। शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी। जिला विकास अधिकारी रमाकांत तिवारी ने कहा कि यदि शिकायत मिलती है कि जांच बाद कार्रवाई की जाएगी।

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