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Varanasi News: काशी के अखाड़ों को सहेजने की जरूरत, जोड़ी और गदा को मिले मान्यता; सरकार से की गई अपील
Sun, 23 Jun 2024 06:22 PM IST
अमन विश्वकर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
Published by: अमन विश्वकर्मा
Updated Sun, 23 Jun 2024 06:22 PM IST
सार
Varanasi News: बताया गया कि 70 के दशक में काशी के अखाड़ों पर जोड़ी, गदा, नाल डंबल की प्रतियोगिताएं अखाड़ों पर आयोजित होती थी। इसके खिलाड़ियों का खूब मान होता था। आज भी नांग पंचमी के दिन ही अखाड़ों पर इनकी कला देखने के लिए लोग जुटते हैं लेकिन साल भर वे किस हाल में रहते हैं कोई ध्यान नहीं देता। जबसे मैट कुश्ती को मान्यता मिली है तबसे अखाड़े खत्म होते जा रहे हैं।
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पत्रकारवार्ता में जानकारी देते यूपी नान ओलंपिक एसोसिएशन के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
के यूपी नान ओलंपिक एसोसिएशन के सह-सचिव रविंद्र कुमार गोड़ ने केंद्र व राज्य सरकार से काशी के अखाड़ों पर खेली जाने वाली पारंपरिक जोड़ी, गदा, नाल और डंबल कला को मान्यता देने की मांग की। कहा कि अगर सरकार इन खेलों को मान्यता दे तो खिलाड़ी इसमें पदकों झड़ी लगा सकते हैं।
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रविवार दोपहर मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने सरकार और खेल संघें से पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की मांग की।
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आरोप लगाया कि सरकार की बेरूखी की वजह से काशी के पारंपरिक अखाड़ों पर खेली जाने वाली जोड़ी-नाल की कला खत्म होती जा रही हैं। अखाड़ों के पुराने वैभवन को वापस लोने के लिए काशी में राष्ट्रीय प्रतियोगिता करानी की मांग की है।
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कहा कि संरक्षण नहीं मिलने की वजह से काशी के पारंपरिक खेल खत्म होने की करार पर पहुंच गए है। सिंधिया घाट स्थित नरसिंह व्यायामशाला के कल्लू पहलवान ने बताया कि आज कुश्ती के अखाड़े बंद हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य सरकार से अखाड़ों पर खेलों का आयोजन कराने और इसको मान्यता देने की मांग की।