काशी में आज मनेगी दीपावली : वृषभ और सिंह लग्न में 4:10 घंटे का शुभ मुहूर्त, लक्ष्मी पूजन का अनुपम संयोग
Varanasi News : काशी नगरी में गुरुवार को हर्षोल्लास का माहौल है। दुकानों और घरों में साफ-सफाई के बाद अब पूजन की तैयारियां चल रही हैं। शुभ मुहूर्त की शुरुआत होते ही लक्ष्मी-गणेश की पूजा का शुभारंभ हो जाएगा। लोग धन-धान्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। आइए जानते हैं क्या है पूजन का शुभ मुहूर्त...
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गुरुवार को शुभ मुहूर्त में दीपावली मनाई जाएगी। बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर और काशी विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्टी प्रो चंद्रमौलि उपाध्याय के मुताबिक, वृषभ और सिंह लग्न में अलग-अलग समय पर लगभग 4:10 घंटे का शुभ मुहूर्त बन रहा है।
वृषभ लग्न काल शाम 6:28 बजे से 8:24 बजे तक (1:56 घंटे) और सिंह लग्न काल रात 12:56 बजे से 3:10 बजे तक (2:14 घंटे) रहेगा। इस अवधि में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती, कुबेर की पूजा का अनुपम संयोग बन रहा है। काली पूजा भी होगी।
काशी विद्वत परिषद और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने गुरुवार (31 अक्तूबर) को ही दीपावली मनाने का एलान किया है। साथ ही गोधूलि बेला, महानिशीथ, वृषभ लग्न और सिंह लग्न काल का विशेष मुहूर्त बताया है।
काशी के पंचागों के मुताबिक, गुरुवार की शाम से देर रात तक के शुभ मुहूर्त अलग-अलग काल में मिल रहे हैं। इस बार प्रदोषकाल और महानिशीथ के साथ मां लक्ष्मी के पूजन का अनुपम संयोग बन रहा है। इस काल में पूजन से मां लक्ष्मी की भक्तों पर कृपा बरसेगी, उन्हें सुख-समृ्द्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी।
40 सामग्री से कर सकते हैं पूजन
सोने, चांदी के सिक्के, बताशा एवं गुड़, इलायची, सुपारी, पान, दुर्वा, पंचपात्र, कच्चा दूध, दही, शुद्ध देशी घी, गंगाजल, गेहूं, कांसे या चांदी की थाली, लाल वस्त्र, सिंदूर, नारियाल, मिष्ठान, ऋतु फल, लाल चन्दन, पुष्पहार, इत्र, गेली, मौली, केशर, कलश, चावल, कपूर, हल्दी, धनिया, तेल, बाती, चीनी के खिलौने आदि शामिल है।
इनकी भी सुनें
वृषभ और सिंह लग्न का मुहूर्त सर्वोत्तम है। दीपदान, लक्ष्मी और काली पूजन के लिए दो काल में 4:10 घंटे का मुहूर्त मिल रहा है। - प्रो चंद्रमौलि उपाध्याय, ट्रस्टी, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
दीपावली बृहस्पतिवार को ही मनेगी। देर शाम से देर रात तक के मुहूर्त मिल रहे हैं। मुहूर्त के हिसाब से दीपदान और लक्ष्मी पूजन का संयोग बन रहा है। - प्रो रामनारायण द्विवेदी, महामंत्री काशी विद्वत परिषद
प्रदोषकाल सूर्यास्त के बाद 48 मिनट तक रहता है। एक नवंबर को प्रदोषकाल व महानिशीकाल में कार्तिक अमावस्या नहीं पड़ रहा है, इसलिए दीपावली गुरुवार को ही है। - ऋषि द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य
ये है मुहूर्त
| गोधूलि बेला | 5:34 बजे से 6:10: बजे तक |
| वृषभ लग्न काल | शाम 6:28 बजे से 8:24 बजे तक |
| महानिशीथ काल | |
| लक्ष्मी पूजन | रात 11:38 बजे से 12:30 बजे तक |
| सिंह लग्न काल | रात 12:56 बजे से 3:10 बजे तक |
| चौघड़िया | शाम 4:30 बजे से 6 बजे तक |