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'पूरुबे से उगेले नरायन पछिमे होला उजियार...'
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 08 Nov 2016 01:58 AM IST
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वाराणसी में छठ
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पतितपावनी गंगा के तटों पर मंगल कामनाओं से भरी महिलाओं ने सोमवार की भोर में पूरब की लाली का घंटों का इंतजार किया। पौ फटने से पहले पूरब के आसमान में लालिमा फैलते ही घाटों पर फुलझड़ियां छूटने लगीं। आतिशी नजारे छाने लगे। कहीं बैंडबाजा तो कहीं नगाड़ों पर नाच शुरू हो गया। कमर तक पानी में डाला लेकर खड़ी गीत गाती महिलाओं के बीच लाखों का कारवां हर हर महादेव के गगनभेदी जयघोष के साथ अरुणोदय की छटा से निहाल हो उठा। महिलाएं दीप जलाकर सूप-दउरा के साथ फेरी लगाकर अर्घ्य देने लगीं। राजघाट से विश्वसुंदरी पुल तक एकचाल नजारा दिखा। सूर्य सरोवर, वरुणा तट के अलावा गोमती के घाटों पर भी व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर सूर्योपासना की।
गंगा का किनारा सोमवार की ब्रह्मबेला में डाला षष्ठी के अनंत उत्सवी भावों, कामनाओं का तट बन गया। चार बजे भोर से ही घरों से महिलाएं उगते सूर्य के दर्शन के लिए घरों से निकल पड़ीं। वेदियों के साथ डाला और कलशों पर दीप जलाए गए। समूहों में डाला षष्ठी के गीत गूंजने लगे। व्रती महिलाओं की गंगा तटों पर घुटने तक पानी में शृंखला बनने लगी। कुछ देर में ही राजघाट से विश्व सुंदरी पुल तक जहां तक नजर जा सकी, व्रतियों की कतार ही डाला उठाए भगवान सूर्य की प्रतीक्षा में आतुर दिखी। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राणा महल घाट, दरभंगा घाट, पांडेय घाट, चौकी घाट, केदार घाट, हनुमान घाट, अस्सी घाट, राज घाट, प्रह्लाद घाट, नगवा, सामने घाट समेत कई घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देने का उत्सव यादगार बना।
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गंगा का किनारा सोमवार की ब्रह्मबेला में डाला षष्ठी के अनंत उत्सवी भावों, कामनाओं का तट बन गया। चार बजे भोर से ही घरों से महिलाएं उगते सूर्य के दर्शन के लिए घरों से निकल पड़ीं। वेदियों के साथ डाला और कलशों पर दीप जलाए गए। समूहों में डाला षष्ठी के गीत गूंजने लगे। व्रती महिलाओं की गंगा तटों पर घुटने तक पानी में शृंखला बनने लगी। कुछ देर में ही राजघाट से विश्व सुंदरी पुल तक जहां तक नजर जा सकी, व्रतियों की कतार ही डाला उठाए भगवान सूर्य की प्रतीक्षा में आतुर दिखी। दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, राणा महल घाट, दरभंगा घाट, पांडेय घाट, चौकी घाट, केदार घाट, हनुमान घाट, अस्सी घाट, राज घाट, प्रह्लाद घाट, नगवा, सामने घाट समेत कई घाटों पर सूर्य को अर्घ्य देने का उत्सव यादगार बना।
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