वाराणसी सिलिंडर ब्लास्ट: बारिश ने बचाई कई लोगों की जान, पढ़ें दर्दनाक हादसे की इनसाइड स्टोरी
जहां गैस से गुब्बारा भरा जा रहा था, वहीं पर 20 से 25 लोगों की जुटान थी और आसपास इलाके के लोगों की बैठकी भी उसी स्थल के पास हो रही थी। हालांकि बूंदाबांदी शुरू होने पर मजार के पास से लोग हट गए।
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रक्षाबंधन के दिन रविवार की शाम वाराणसी के सूजाबाद में पोलाव शहीद बाबा मजार के पास दर्दनाक हादसा हो गया। गुब्बारों में गैस भरने वाला सिलेंडर फट गया। हादसे में गुब्बारे बेचने वाले और एक महिला की मौत हो गई। चार घायलों का इलाज बीएचयू स्थित ट्रामा सेंटर में जारी है।
विस्फोट स्थल पर जुटे लोगों के बीच इस बात की चर्चाएं जोरों पर रहीं कि बारिश ने कई लोगों की जान बचा ली। घटना से चंद मिनट पहले मजार के पास लोगों की भीड़ थी। जहां गैस से गुब्बारा भरा जा रहा था, वहीं पर 20 से 25 लोगों की जुटान थी और आसपास इलाके के लोगों की बैठकी भी उसी स्थल के पास हो रही थी। हालांकि बूंदाबांदी शुरू होने पर मजार के पास से लोग हट गए।
पूर्व प्रधान वीरेंद्र यादव के अनुसार, कई लोग तो सिर्फ बारिश से बचने के लिए मौके से हट गए। कुछ ही मिनट बाद धमाका हुआ। यदि बारिश नहीं होती और लोग नहीं हटते तो फिर मंजर और भी भयावह हो सकता था। बर्तन पर पॉलिश करने वाले आसिफ अपनी पांच साल की बेटी को लेकर सब्जी लेने निकला था और चपेट में आ गया।
पिता-पुत्री के दोनों पैर बुरी तरह जख्मी हो गए। गुब्बारे में गैस भरकर परिवार का पेट पालने वाला आदमपुर कोनिया निवासी सुरेंद्र उर्फ लल्ला सेठ को क्या पता था कि रविवार उसका आखिरी दिन है। बिलखते हुए एक साल की बच्ची को गोद में लेकर ट्रामा सेंटर पहुंची पत्नी पूजा देवी पति का शव देखते ही बेसुध हो गई।
हादसे में दाहिना पैर गंवाने वाले बबलू की तड़प देख मानो लोगों का कलेजा पसीज गया। भाई की कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र की कामना कर घर लौटने वाली गीता देवी नहीं जानती थी कि आखिरी बार मायके में मिली है। मां गीता देवी को आंखों के सामने दम तोड़ता देख बेटा नवीन भी हादसे में जख्मी होकर कराह रहा था।
ट्रॉली के उड़ गए थे परखच्चे, 100 मीटर तक फैले थे टुकड़े
आसपास तीन-चार साइकिल व बाइक भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। फारेंसिक टीम मौके पर पहुंची तो गैस सिलिंडर की टंकी के फैले टुकड़े को कब्जे में ले लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि टंकी काफी पुरानी और पतली होने के कारण यह दबाव सह नहीं सकी और विस्फोट हो गया।
2018 में हुए हादसे की याद हुई ताजा
पहले भी कई बार गुब्बारा में हवा भरने वाली सिलिंडर की टंकी फट चुकी है। 24 दिसंबर 2018 को जैतपुरा थाना अंतर्गत नक्खीघाट पुल के पास सिराजुद्दीन के मकान में गुब्बारे में गैस भरते समय सिलिंडर ब्लास्ट होने से आठ लोग जख्मी हुए थे। इसमें अमरजीत के दोनों पैर व बायां हाथ उड़ गया था। सिलिंडर टंकी फटने से घायल आठ सदस्यों को ठीक होने में साल भर लग गए थे। सूजाबाद की घटना ने नक्खीघाट हादसे की याद ताजा कर दी।
यही नहीं, अक्तूबर 2018 में रामनगर के रामलीला के दौरान गुब्बारा में गैस भरने के दौरान हुए विस्फोट में बजरडीहा निवासी बाबू घायल हो गया था। इस तरह के हादसे कई बार हो चुके है, लेकिन जिम्मेदार अब तक बेखर ही रहे हैं। पुलिस व प्रशासिनक महकमे की अनदेखी की वजह से खतरों का खेल धड़ल्ले से जारी है।
क्यों फटता है गुब्बारा भरने वाला सिलिंडर
बीएचयू में रसायन विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ राजेश कुमार ने कहा गुब्बारा भरने वाले सिलिंडर में हाइड्रोजन गैस का इस्तेमाल होता है। यह डीजल, पेट्रोल से भी ज्यादा ज्वलनशील होता है। इससे होने वाली घटना में ज्यादा नुकसान होने की संभावना रहती है। हाइड्रोजन जो है वह नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से हल्की होती है, इसलिए गुब्बारा भी उड़ने लगता है। कभी कभी गर्म हवा भी गुब्बारा में भरते हैं, जिसकी गर्मी से वहां की हवा हल्की हो जाती है।