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सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित होगी असि नदी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 17 Jun 2016 01:50 AM IST
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असि नदी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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वाराणसी के अस्तित्व से जुड़ी असि नदी को यहां की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाएगा। मृतप्राय हो चुकी इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए भगीरथ की भूमिका में बीएचयू आगे आया है। बीएचयू के महामना मालवीय रिसर्च सेंटर फॉर गंगा रिवर डेवलपमेंट एंड वाटर रिसोर्सेज मैनेजमेंट की ओर से बनाई गई कार्ययोजना पर अमल होने पर आठ किमी लंबी पौराणिक महत्व की इस नदी में न केवल फिर से पुण्य की डुबकी लग सकेगी, बल्कि इको-टूरिज्म स्पॉट के रूप में देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए दर्शनीय भी हो जाएगी। असि-गंगा संगम का सौंदर्यीकरण होगा। असि के किनारों पर काशी के आध्यात्म-संस्कृति से परिचित कराने वाली आर्ट गैलरी के साथ-साथ दिल को लुभाने वाली हरियाली भी होगी। कार्ययोजना के मुताबिक इस नदी का कायाकल्प तीन चरणों में किया जाएगा।
बीएचयू असि नदी के उद्धार की योजना को साकार करने के लिए मिशन क्लीन गंगा और आईआईटी कानपुर का भी तकनीकी सहयोग लेगा। कार्ययोजना के मुताबिक असि नदी की तलहटी में मौजूदा अतिक्रमण, प्रदूषण के कारक तत्वों की पड़ताल के लिए उद्गम स्थल कंचनपुर ताल से संगम स्थल अस्सी घाट तक के बीच की वीडियो रिकार्डिंग ड्रोन कैमरे की मदद से कराई जाएगी। इसी आधार पर नदी के किनारों का विकास सुनिश्चित किया जाएगा। नदी में गिरने वाले अवजल का आकलन कर उसके शोधन की अलग से व्यवस्था कराने के साथ ही असि में एक बूंद भी अवजल न जाने देने की योजना है। इसके लिए नालों के लिए अलग से इंटरसेप्टर बनाए जाएंगे। असि नदी के बेसिन में आने वाले पुराने कुंडों, सरोवरों को भी स्वच्छ कर लबालब पानी से भरा जाएगा, ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। स्नान के लिए घाटों का निर्माण कराने के साथ ही खूबसूरत हरित पट्टी का विकास किया जाएगा। इसके लिए युवाओं, महिलाओं की सहभागिता और जन जागरूकता तय की जाएगी।
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बीएचयू असि नदी के उद्धार की योजना को साकार करने के लिए मिशन क्लीन गंगा और आईआईटी कानपुर का भी तकनीकी सहयोग लेगा। कार्ययोजना के मुताबिक असि नदी की तलहटी में मौजूदा अतिक्रमण, प्रदूषण के कारक तत्वों की पड़ताल के लिए उद्गम स्थल कंचनपुर ताल से संगम स्थल अस्सी घाट तक के बीच की वीडियो रिकार्डिंग ड्रोन कैमरे की मदद से कराई जाएगी। इसी आधार पर नदी के किनारों का विकास सुनिश्चित किया जाएगा। नदी में गिरने वाले अवजल का आकलन कर उसके शोधन की अलग से व्यवस्था कराने के साथ ही असि में एक बूंद भी अवजल न जाने देने की योजना है। इसके लिए नालों के लिए अलग से इंटरसेप्टर बनाए जाएंगे। असि नदी के बेसिन में आने वाले पुराने कुंडों, सरोवरों को भी स्वच्छ कर लबालब पानी से भरा जाएगा, ताकि भूजल स्तर सुधारा जा सके। स्नान के लिए घाटों का निर्माण कराने के साथ ही खूबसूरत हरित पट्टी का विकास किया जाएगा। इसके लिए युवाओं, महिलाओं की सहभागिता और जन जागरूकता तय की जाएगी।
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