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ठुमरी साम्राज्ञी की स्मृति में पत्रिका छायानट का हुआ विमोचन
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पद्मविभूषण ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी (अप्पाजी) की स्मृति में रविवार की शाम गायन, वादन से सजी रही। उनके शिष्यों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुति से अप्पाजी को स्वरांजलि दी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से गिरिजा देवी की स्मृति में पत्रिका छायानट का विमोचन हुआ। मलदहिया स्थित होटल में आयोजित विमोचन समारोह के दौरान शिष्यों ने जहां स्वरांजलि अर्पित की वहीं काशी की जनता ने ठुमरी साम्राज्ञी को नमन किया।
सांस्कृतिक आयोजन की सुमधुर शृंखला में अप्पाजी की प्रिय शिष्या पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने राग मधुवंती में मध्य तीन ताल में गोविंद गुण गावो से कार्यक्रम की शुरुआत की। अप्पाजी की प्रिय ठुमरी मोरा सईया उतरेंगे पार साथ में, नईया जरा धीरे चलो गाया तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद दादरा सांवरिया प्यारा रे मोरा गोईया की प्रस्तुति से गायन को विराम दिया।
अप्पाजी के शिष्य राहुल मिश्र एवं रोहित मिश्र की जोड़ी ने राग भीमपलासी पर मध्य तीन ताल में अजहू न आए श्याम की प्रस्तुति की। इसके बाद उन्होंने द्रुुत तीन ताल में जा जा रहे मंदिरवा, कैसा जादू डारा की सुमधुर प्रस्तुतियां दी। तबले पर आनंद मिश्र और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इसके उपरांत पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अप्पा जी को स्वरांजलि अर्पित की। तबले पर पं. रामकुमार मिश्र व हारमोनियम पर पं धर्मनाथ मिश्र ने संगत की।
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इससे पहले पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अकादमी की पत्रिका का विमोचन किया। उन्होंने काशी की विभूतियों पर इस तरह के आयोजन करने की बात कही। डॉ. तिवारी ने कहा कि अप्पा जी आने वाली पीढि़यों के लिए आदर्श प्रतिमान हैं। अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि अप्पा जी की यशकाया को नमन करना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। इस दौरान उपाध्यक्ष धन्नूलाल गौतम, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, मंजु सुंदरम, राकेश श्रीवास्तव मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री तथा धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के सचिव तरूण राज ने किया। छायानट पत्रिका का संपादन आलोक पराड़कर ने किया है । इस अवसर पर वीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रमोद मिश्र, धर्मेंद्र सिंह, डॉ. रमेश भाटिया, पं. कामेश्वर नाथ मिश्र, पं. सुरेन्द्रमोहन मिश्र, प्रो. राजेश शाह, सुचरिता गुप्ता, प्रो. कृष्णा चक्रबर्ती, ममता शर्मा, नागेन्द्र दुबे, डॉ. ऋत्विक सान्याल उपस्थित थे।
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सांस्कृतिक आयोजन की सुमधुर शृंखला में अप्पाजी की प्रिय शिष्या पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने राग मधुवंती में मध्य तीन ताल में गोविंद गुण गावो से कार्यक्रम की शुरुआत की। अप्पाजी की प्रिय ठुमरी मोरा सईया उतरेंगे पार साथ में, नईया जरा धीरे चलो गाया तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद दादरा सांवरिया प्यारा रे मोरा गोईया की प्रस्तुति से गायन को विराम दिया।
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अप्पाजी के शिष्य राहुल मिश्र एवं रोहित मिश्र की जोड़ी ने राग भीमपलासी पर मध्य तीन ताल में अजहू न आए श्याम की प्रस्तुति की। इसके बाद उन्होंने द्रुुत तीन ताल में जा जा रहे मंदिरवा, कैसा जादू डारा की सुमधुर प्रस्तुतियां दी। तबले पर आनंद मिश्र और हारमोनियम पर पं. धर्मनाथ मिश्र ने संगत की। इसके उपरांत पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अप्पा जी को स्वरांजलि अर्पित की। तबले पर पं. रामकुमार मिश्र व हारमोनियम पर पं धर्मनाथ मिश्र ने संगत की।
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इससे पहले पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अकादमी की पत्रिका का विमोचन किया। उन्होंने काशी की विभूतियों पर इस तरह के आयोजन करने की बात कही। डॉ. तिवारी ने कहा कि अप्पा जी आने वाली पीढि़यों के लिए आदर्श प्रतिमान हैं। अकादमी के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने कहा कि अप्पा जी की यशकाया को नमन करना ही इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। इस दौरान उपाध्यक्ष धन्नूलाल गौतम, पद्मश्री मालिनी अवस्थी, मंजु सुंदरम, राकेश श्रीवास्तव मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अंकिता खत्री तथा धन्यवाद ज्ञापन अकादमी के सचिव तरूण राज ने किया। छायानट पत्रिका का संपादन आलोक पराड़कर ने किया है । इस अवसर पर वीरेंद्र प्रताप सिंह, प्रमोद मिश्र, धर्मेंद्र सिंह, डॉ. रमेश भाटिया, पं. कामेश्वर नाथ मिश्र, पं. सुरेन्द्रमोहन मिश्र, प्रो. राजेश शाह, सुचरिता गुप्ता, प्रो. कृष्णा चक्रबर्ती, ममता शर्मा, नागेन्द्र दुबे, डॉ. ऋत्विक सान्याल उपस्थित थे।