पोते ने ही चुराई थी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पांचवीं शहनाई
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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पोते नजरे हसन उर्फ शादाब ने उनकी चार नहीं बल्कि पांच शहनाई चुराई थी। पुलिस ने कल रात शादाब से पूछताछ की तो चांदी की बनी पांचवीं शहनाई के बारे में पता चला। पांचवीं शहनाई को चाहमामा स्थित काजिम हुसैन के घर से बरामद किया गया।
सीओ सत्येंद्र तिवारी ने बताया कि इस शहनाई को पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने उस्ताद को भेंट किया था। शादाब पांचवीं शहनाई को बेंचकर ओडिशा भागने की फिराक में था। उन्होंने बताया कि शादाब ने पांचों शहनाई एक साथ नहीं बल्कि एक-एक कर चुराया था।
वहीं सोने के कंगन और इनामी तश्तरी का पता नहीं लगा। इंस्पेक्टर चौक ने बताया कि कंगन और तश्तरी की चोरी की गलत सूचना दी गई थी। इससे पहले बुधवार को एसटीएफ ने चांदी की चार शहनाइयां बरामद की थीं। इन्हें नजरे हसन उर्फ शादाब ने मौज-मस्ती में हुुुई उधारी चुकाने के लिए चुराई थीं।
देश के लिए जो शहनाइयां धरोहर थीं, उनका सौदा शादाब ने छोटी पियरी के सर्राफ शंकर लाल सेठ और उसके बेटे सुजीत सेठ से महज 17 हजार रुपये में किया था। मंगलवार को यह खुलासा करते हुए एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने चौक के हड़हा बीर बाबा मंदिर के पास से नजरे हसन, शंकरलाल और सुजीत को गिरफ्तार कर लिया।
तीनों के पास से तीन शहनाइयों की एक किलो 66 ग्राम चांदी गली हुई, 4200 रुपये और लकड़ी की एक शहनाई भी बरामद की गई है। उस्ताद मुहर्रम की पांचवीं और आठवीं तारीख को इसी शहनाई से आंसुओं का नजराना पेश करते थे।
गलाई गई तीनों शहनाइयां क्रमश: पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल व लालू प्रसाद यादव ने उन्हें उपहार में दी थीं। इस बीच घटना का खुलासा होने के बाद शादाब के पिता और उस्ताद के सबसे छोटे बेटे काजिम हुसैन घर का ताला बंद कर कहीं चले गए हैं।
एसटीएफ की वाराणसी यूनिट ने शादाब को किया गिरफ्तार
दालमंडी क्षेत्र के चाहमामा निवासी काजिम हुसैन ने बीते साल चार दिसंबर की रात को पुलिस को सूचना दी कि उनके पिता उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की चांदी की शहनाइयां उनके घर में रखे बक्से का ताला तोड़कर चोरी कर ली गई है।
जब घटना हुई, तब काजिम हड़हा स्थित अपने पुश्तैनी मकान पर परिवार के साथ गए हुए थे। चौक पुलिस और क्राइम ब्रांच की जांच-पड़ताल में कुछ साफ नहीं होने पर एसटीएफ को भी इसकी जांच में लगाया गया था। सर्विलांस से सामने आया कि उस्ताद की शहनाइयां काजिम के बेटे नजरे हसन ने ही शहनाई चुराईं हैं और वह भागने वाला है।
मंगलवार को पता चला कि नजरे हसन हड़हा बीर बाबा मंदिर के समीप किसी का इंतजार कर रहा है। इस पर एसटीएफ इंस्पेक्टर विपिन राय की अगुवाई में टीम ने घेरेबंदी की। थोड़ी ही देर में दो लोग मौके पर पहुंचे और नजरे हसन को रुपये देने लगे तो एसटीएफ ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में नजरे हसन ने बताया कि एक दिसंबर को घर में रखे बड़े बक्से का ताला तोड़कर शहनाइयां चुरा ली थीं। चोरी की गुत्थी सुलझने न पाए इसलिए उसने मुख्य द्वार का ताला नहीं तोड़ा था।
बताया कि उसने चारों शहनाइयोें को चुराकर छोटी पियरी स्थित शंकर ज्वेलर्स के मालिक शंकर लाल और उसके बेटे सुजीत से 17 हजार रुपये में सौदा किया। सर्राफ पिता-पुत्र ने बताया कि तीन शहनाइयां चांदी की थी जबकि चौथी शहनाई लकड़ी की थी। उस पर चांदी का केवल पत्तर लगा था।
मंगलवार को सौदे के बचे हुए 4200 रुपये और लकड़ी वाली शहनाई नजरे हसन को देने आए थे। इस पर एसटीएफ ने सर्राफ की दूकान से शहनाई को गला कर निकाली गई एक किलो 66 ग्राम चांदी बरामद कर ली।