सोनभद्र नरसंहार : आदिवासी बोले- जहां लाशें गिरीं, वह जमीन हमें चाहिए
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सोनभद्र जिले के उभ्भा में जमीन विवाद में 10 लोगों की हत्या के बाद सरकार से मिली राहत से पीड़ित परिवार संतुष्ट तो हैं, लेकिन जमीन पाने और घटनास्थल पर शहीद स्थल बनवाने की कसक उनके मन में है। गांव के लोगों का कहना है कि जहां उनके अपनों की लाशें गिरी हैं, वह जमीन हर हाल में चाहिए।
मंगलवार को उभ्भा निवासी मूर्तिया ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान बहादुर सिंह गोंड़, मृतक अशोक के भाई इंद्रजीत, मृतका सुखवंती के भतीजे सुमेर, घायल विजय कुमार, मृतक रामसुंदर की पत्नी सीता, डबलू, शिवकुमारी का कहना है कि गांव में विकास और सहायता राशि ही पर्याप्त नहीं है। जिस जमीन के लिए आदिवासियों की हत्या की गई है, वह जमीन चाहिए, क्योंकि वह जमीन उनकी है और इसे वे कई पीढ़ियों से जोत कोड़ रहे हैं।
सरकार से मिला धन तो एक दिन खत्म हो जाएगा। उन्हें जमीन चाहिए ताकि वे परिजनों का भरण पोषण कर सकें। कहा, वह जमीन आदिवासियों के नाम पट्टा की जाए। जब तक जमीन के कागजात हाथ में नहीं आ जाते, वे मांग करते रहेंगे।
आदिवासियों का कहना है कि उनके समुदाय में अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए जिनकी मौत अथवा हत्या होती है, उन लोगों का स्थान आदिवासी समुदाय में देवता की तरह होता है और आदिवासी समुदाय उनकी पूजा करता है। घटनास्थल आदिवासियों के लिए देवस्थान के समान है। घटनास्थल पर शहीद स्थल बनाने के लिए आदिवासी समुदाय प्रतिबद्ध है। सरकार उन्हें घटनास्थल पर शहीद स्थल बनाने की अनुमति दे।
उभ्भा कांड में मृतका बसमतिया के पति नंदलाल, घायल कमलावती के पति रामपति, बाबूलाल का कहना है कि घटना के बाद सरकार ने उन्हें सहायता राशि दी है। सभी परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, बिजली, आयुष्मान कार्ड के लिए प्रशासन ने लिखा पढ़ी की है।
उम्मीद है कि ये सब जल्द उन्हें उपलब्ध हो जाएगा। उनका कहना है कि सरकार को उभ्भा के ग्रामीणों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखना होगा। आवासीय आश्रम पद्धति विद्यालय मूर्तिया में न बनाकर उभ्भा में ही बनाया जाए क्योंकि उभ्भा में 90 फीसदी आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। कहा कि मूर्तिया में निर्माणाधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूर्ण कराकर जल्द उसका संचालन किया जाए।