ठेकेदार आत्महत्या : 60 फीसदी काम होने के बाद होता है भुगतान रोकने का खेल
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पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड अधिकारियों और काम करने वाले ठेकेदारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भुगतान रोकने का खेल 60 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद शुरू होता है। दरअसल, ठेकेदार जब 60 प्रतिशत काम पूरा कर लेता है, तब वह भुगतान के लिए अभियंताओं के यहां जाता है।
अभियंता काफी टरकाने के बाद थोड़ा भुगतान करते हैं। भुगतान नहीं होने से परेशान ठेकेदार ‘कमीशन के ऊपर’ जाने की बात करता है, तब उसका भुगतान किया जाता है।
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ठेकेदारों को काम तभी दिया जाता है, जब कमीशन का पैसा उनके करीबियों के पास पहुंच जाता है। कई बार कमीशन के एवज में रुपयों के बजाय अभियंता एसेट लेते हैं। इनमें फ्लैट, कार, सोने की सिल्ली और चांदी की ईंट जैसी चीजें शामिल होती हैं।
ठेकेदारों ने बताया कि प्रोजेक्ट लंबा खिंचने पर लागत काफी बढ़ जाती है, ऐसे में कई बार ठेकेदारों को मामूली मुनाफा होता है। इस पर अभियंता, ठेकेदारों से अपना मुनाफा छोड़ने की बात करते हैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
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अवधेश चंद्र श्रीवास्तव के प्रकरण में भी ऐसा ही कुछ था। कबीरचौरा में बन रहे एमसीएच विंग का निर्माण चार साल से चल रहा है। इस प्रोजेक्ट को 2017 में ही पूरा हो जाना था, लेकिन काम लंबा खिंचने से लागत बढ़ रही थी। मुनाफा कम हो रहा था। ठेकेदारों ने कहा कि इस मामले में 10 लाख रुपये कमीशन जेई को दिया गया था।