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खुदकुशी से 15 घंटे पहले गिड़गिड़ाए थे भुगतान के लिए अवधेश, छह दिन से नहीं गए थे साइट पर

Wed, 28 Aug 2019 08:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 28 Aug 2019 08:24 PM IST
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pwd contractor not go to work before suicide gun shot himself varanasi
ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला

पीडब्लूडी से निर्माण कार्य के पांच करोड़ रुपये का भुगतान न होने के कारण ठेकेदार अवधेश श्रीवास्तव अवसादग्रस्त हो गए थे। अवधेश के चालक बसंत के अनुसार वह बीते छह दिनों से कबीरचौरा स्थित जिला महिला अस्पताल की साइट पर नहीं जा रहे थे। बुधवार की सुबह तक सब कुछ सामान्य था और अचानक वह ऐसा आत्मघाती कदम उठाएंगे, ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था।

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अवधेश के सुसाइड नोट के अनुसार पीडब्लूडी से बकाया का भुगतान न होने के कारण वह आर्थिक तंगी का शिकार हो गए थे। इस वजह से उन्होंने पत्नी प्रतिभा के जेवर गिरवी रख दिए थे। उन्हें उम्मीद थी कि विभागीय अभियंता भुगतान कराएंगे तो आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन ऐसा संभव न हो सका।
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27 अगस्त की शाम सात बजे के लगभग उन्होंने पीडब्लूडी के निर्माण खंड भवन के अधिशासी अभियंता सतीश चंद्र वर्मा से मुलाकात कर बकाया के भुगतान की गुहार लगाई थी। इस पर अधिशासी अभियंता ने मेजरमेंट रिपोर्ट न होने का हवाला देकर जेई को बुलाया था। इसके बाद रात भर अवधेश ने ना जाने क्या सोचा और सुबह पीडब्लूडी आफिस जाकर खुदकुशी कर ली।

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उधर, अवधेश के कारोबार के साझीदार अरविंद सिंह ने कहा कि हमारे दोस्त के बकाया का भुगतान हो जाता तो यह दिन न देखना पड़ता। भुगतान न होने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। बीते एक साल से पति-पत्नी की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। सप्लायरों के फोन और तगादा से वह परेशान हो गए थे। इन सबके पीछे की अहम वजह पीडब्लूडी के अभियंता और विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार है।

आखिर क्या हुआ था चीफ इंजीनियर के कमरे में चार मिनट तक :
चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के अनुसार अवधेश उनके कमरे में आए और परिचय देकर खुद की कनपटी पर गोली मार लिए। वहीं, विभाग के कर्मचारियों और मौजूद रहे ठेकेदारों के अनुसार अवधेश चीफ इंजीनियर के कमरे में घुसे। इसके तीन से चार मिनट बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी। तीन से चार मिनट में क्या हुआ, यह तफ्तीश का विषय है। तफ्तीश कर रही कैंट पुलिस ने तीन से चार मिनट के अंतराल को जांच का महत्वपूर्ण बिंदु माना है।

सीट पर सुसाइड नोट रख कर बोले, अरविंद को दे देना :
अपनी सफारी गाड़ी से उतरते समय अवधेश ने अपनी सीट पर छह पन्नों का सुसाइड नोट रखा। चालक बसंत से कहा कि इन कागजों को अरविंद को दे देना। बसंत को कुछ समझ में नहीं आया तो उसने कहा कि अभी आप लौट कर आएंगे तो दे दिया जाएगा। इस पर अवधेश कुछ नहीं बोले। इसके पांच से छह मिनट बाद चीफ इंजीनियर कार्यालय परिसर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी और लोग बाहर की ओर दौड़े तो बसंत को अवधेश की आत्महत्या की जानकारी हुई।

काम करोड़ों-अरबों का, सीसीटीवी कैमरा कहीं नहीं :
पीडब्लूडी कॉलोनी स्थित अभियंताओं के कमरे से करोड़ों-अरबों रुपये का काम होता है, इसके बावजूद कहीं सीसी कैमरे नहीं दिखे। इसे लेकर कैंट इंस्पेक्टर से लगायत एसएसपी तक हैरत में रहे। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि जहां हमेशा झगड़ा-फसाद की आशंका रहती है और हत्याएं भी हो चुकी हैं, वहां सीसी कैमरों का न लगा होना आश्चर्यजनक बात है।

ठेकेदार शिकायतें लिख कर दें, जांच में करेंगे शामिल : एसएसपी
तफ्तीश के बाद 2:30 बजे के लगभग एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने पीडब्लूडी के ठेकेदारों से मुलाकात की। इस दौरान ठेकेदारों ने अभियंताओं पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए। एसएसपी ने आश्वस्त किया कि ठेकेदार शिकायतें लिख कर दें। शिकायतों को अवधेश की आत्महत्या से संबंधित मुकदमे की जांच में शामिल कर सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। एसएसपी के निकलने के बाद ठेकेदारों ने हंगामा करने की कोशिश की तो पुलिस ने शांत करा दिया।

रहन-सहन सामान्य, नहीं दबते थे माफियाओं से भी :
पीडब्लूडी के ठेकेदारों ने बताया कि आमतौर पर ठेकेदारी करने वाले को समाज में रौबदार व्यक्ति माना जाता है। अवधेश इससे उलट बेहद ही सीधेसादे किस्म के व्यक्ति थे। सभी से प्रेम से मिलना और हालचाल पूछना उनकी आदत में शुमार था। हाल ही में उन्होंने घर पर पूजापाठ कराया था तो विभागीय अभियंताओं के साथ ही कई ठेकेदार भी शामिल हुए थे।

ठेकेदारों ने यह भी बताया कि अवधेश ठेकेदारी के दौरान कभी माफियाओं से भी नहीं दबे। चार-पांच साल पहले उन्होंने मुन्ना बजरंगी और पूर्वांचल के एक बाहुबली विधायक के खिलाफ प्रेस कांफ्रेंस कर कैंट थाने में तहरीर दी थी। अवधेश कहते थे कि मेहनत कर आगे बढ़े हैं तो न किसी के आगे न दबेंगे और न झुकेंगे।

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