जौनपुर हादसा: 1978 में भी हुई थी भीषण बस दुर्घटना, 57 लोगों की गई थी जान
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जौनपुर के बरगुदर स्थित सई नदी के बरगुदर पुल के पास बुधवार को बस के नदी में गिरने के हादसे ने इसी स्थान पर 1978 में हुई घटना की याद ताजा कर दी। 1978 में कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद से गोरखपुर जा रही रोडवेज बस बरगुदर स्थित पुराने पुल के पास रेलिंग तोड़ते हुए बीच नदी में गिर गई थी।
हादसे में 57 यात्रियों की जान गई थी। उसमें 11 यात्री एक ही परिवार के थे। गोरखपुर जिले के उस परिवार की एक वृद्ध महिला को छोड़ परिवार के सभी सदस्यों की मौत हो गई थी। सई नदी के पुल पर जहां बुधवार को हादसा हुआ, उसके ठीक बगल में सई नदी पर बना शाही पुल आज भी मौजूद है।
उसकी रेलिंग को तोड़कर रोडवेज की बस 1978 में नदी में गिरी थी। उस वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री राम नरेश यादव ने मौके पर पहुंच कर रेस्क्यू आपरेशन का जायजा लिया था। तब वह जनपद की सबसे बड़ी दुर्घटना बताई गई थी।
क्षेत्र के बघौरा निवासी बुजुर्ग तारा चंद उपाध्याय बताते हैं कि उस समय जब लोगों के शव नदी से निकाल कर रखे गए तो पत्थर दिल इंसान भी रो पड़ा था।
परिवहन विभाग ने बैठाई जांच
हादसे के बाद परिवहन विभाग ने घटना की जांच बैठा दी है। परिवहन आयुक्त के रवींद्र नायक ने बताया कि परिवहन विभाग के अधिकारियाें को मौके पर भेजा गया है। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद चालक विजय बहादुर सिंह लापता है।
उसके गांव के संबंधित थाने को वायरलेस कराकर उसका पता कराया जा रहा है। परिचालक शैलेशचंद्र श्रीवास्तव की हादसे में मौत हो गई है। जांच में चालक की लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि हादसे में मारे गए एवं घायल यात्रियों को परिवहन विभाग सहायता करेगा।
रेस्क्यू आपरेशन में ये रहे आगे
बरगुदर पुल पर हुए भीषण हादसे के बाद जिन युवाओं ने सबसे पहले मौके पर पहुंचे कर घायलों की मदद की, उनमें डॉ. बीआर अंबेडकर कालेज के संस्थापक शोभनाथ यादव के पौत्र आनंद सिंह देव तथा अभिषेक सिंह देव के साथ गांव के रवि प्रकाश, फुर्ती लाल, राम नरेश निषाद, नीरज आदि शामिल रहे।
इन लोगों ने भीषण गर्मी में भी हिम्मत न हारते हुए कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। भाजपा नेता प्रमोद यादव ने भी घायलों को बस से निकलवाकर एंबुलेंस में लदवाया।