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अपनों का हाल जानने को बेताब मुलाकाती

Mon, 04 Apr 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराण्ासी
ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराण्ासी Updated Mon, 04 Apr 2016 12:32 AM IST
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Inquire of loved ones Visiting desperate
जेल के बाहर लगी मुलाकातियों की भीड़।
शनिवार को जेल में साढ़े सात घंटे अफरातफरी का असर रविवार को भी दिखा। जेल में बंद अपनों की खैर-खबर लेने के लिए मुलाकातियों भीड़ उमड़ी। कई हैरान-परेशान दिखे तो के आंसू बह रहे थे। उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनों की खैरियत के साथ जेल के अंदर के हालात को लेकर थी। किसी की पत्नी पहुंची तो किसी की बहन, मां और भाई। सुबह सात बजे से दोपहर तक करीब 1600 लोगों ने जेल में बंदियों से मुलाकात की। कोई अपनों के लिए खाने-पीने की चीजें तो कोई दवाइयां लेकर आया था। जेल प्रशासन भी अतिरिक्त सतर्क और चुस्त-दुरुस्त दिखा।
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सोनभद्र की रहने वाली रेशमा अपने पति उपेंद्र गिरी से मिलने आई थी। सुबह सात बजे ही वह यहां पहुंच गई। पति अपहरण के आरोप में जेल में बंद है। रेशमा का कहना था कि शनिवार की शाम उसे पता चला कि जेल में बवाल हुआ है। तभी से परेशान थी। सुबह होते ही पति का हाल जानने के लिए यहां चली आई। गोदौलिया में अन्याय प्रतिकार यात्रा मामले में बड़ी पियरी निवासी गोलू सेठ जेल में बंद है।
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बवाल की खबर सुनकर उसकी मां विमला सुबह ही जेल पहुंच गई थी। बेटे का हाल जानने को वह परेशान थी। बताया था कि जेल में कई लोग बेटे के विरोधी हैं। डर था कि कहीं उसे नुकसान न पहुंचाया गया हो। काशी विद्यापीठ के छात्र नेता कुंदन सिंह समेत कई छात्र अपने दोस्त विद्यापीठ के छात्र भूपेंद्र सिंह से मिलने जेल पहुंचे थे। भूपेंद्र मारपीट के एक मामले में जेल में बंद है।
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बताया कि बवाल की खबर सुनकर वह सहम गए थे। साथी की कुशलक्षेम जानने के लिए आए हैं।  हरहुआ बाजार की रहने वाली एकता सिंह अपने भाई सेना के जवान आनंद सिंह से मिलने पहुंची थी। आनंद अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में जेल में है। एकता का कहना था कि भाई को झूठे मामले में फंसाया गया है। जेल में बवाल की खबर सुनकर वह परेशान थी। डर था कि सेना के जवान के नाते कहीं अन्य बंदियों ने उसके भाई को नुकसान न पहुंचाया हो। भैरोनाथ की रहने वाली रुक्मिणी अपने बेटे बल्लो से मिलने पहुंची थीं। वह दहेज हत्या के मामले में जेल में बंद है। रुक्मिणी ने बताया कि जेल में बवाल की खबर सुनकर वह बहुत परेशान थी। बेटे का हाल जानने के लिए चली आई। बात करते-करते वह रो पड़ीं।
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