वाराणसी में काले हिरण, चीतल और सांभर की सींगें बरामद
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तस्करी कर लाई गईं दुर्लभ प्रजाति के काले हिरण, सांभर और चीतल की नौ सींगें बरामद हुई हैं। इन्हें तस्करी कर यहां पितरकुंडा तिराहा स्थित एक घर के बाहर बग्घी की सीट के नीचे छिपाया गया था। शनिवार को चेतगंज पुलिस ने यहां छापा मारा।
सींगें तो बरामद कर ली गईं लेकिन दोनों तस्कर भागने में कामयाब हो गए। पुलिस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद सींगों की कीमत लाखों में है।
पितरकुंडा तिराहा निवासी दो भाई लंगड़ू उर्फ एहसान और टकलू उर्फ इकबाल के दुर्लभ जानवरों की सींग और खाल की तस्करी में लिप्त होने की सूचना चेतगंज पुलिस तक पहुंची थी। प्रभारी निरीक्षक अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि लंगड़ू और टकलू के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
शनिवार की सुबह सींग की तस्करी की सटीक सूचना पर छापेमारी की गई। लंगड़ू के घर के बाहर खड़ी शादी वाली बग्घी में सीट के नीचे की केबिन में काले हिरण की तीन, सांभर की दो और चीतल की चार सींगें छिपाई गई थीं।
हालांकि लंगड़ू और टकलू छापेमारी से पहले ही वहां से भाग निकले थे। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए दो टीमें लगाई गई हैं। बग्घी जब्त कर ली गई है। लंगड़ू और टकलू पर पहले भी मादक पदार्थों की तस्करी से सहित कई अन्य आरोपों में मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
पूर्वांचल के जिलों में दुर्लभ जानवरों की खाल और सींग की तस्करी सोनभद्र के जंगलोें से होती है। पुलिस का कहना है कि सोनभद्र में जंगलों के आसपास रहने वाले आदिवासियों को लालच देकर तस्कर अपने जाल में फांसते हैं। उनसे दुर्लभ जानवरों की खाल और सींग औने-पौने दाम में खरीदते हैं और फिर देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उन्हें बेचकर मोटी कमाई करते हैं।