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यूपी के इस शहर में नहीं माना जा रहा CM योगी का आदेश , धड़ल्ले से चल रहे बूचड़खाने

Sun, 02 Apr 2017 10:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 02 Apr 2017 10:53 AM IST
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CM Yogi Adityanath order neutralizes, slaughterhouse running at Varanasi night
योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शपथ ग्रहण करने के साथ ही प्रदेश में अवैध ढंग से चल रहे बूचड़खानों को बंद करने का आदेश दिया था। सीएम योगी के आदेश को पूरे प्रदेश में प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है।

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लेकिन प्रदेश का एक ऐसा शहर है जहां सीएम योगी के आदेश की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जी हां यहां बात हो रही है, पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की। बनारस में प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद न तो बूचड़खानों का अवैध संचालन रुका न ही नगर निगम और पुलिस की ओर से शासन की आंखों में धूल झोंकने की कोशिशें बंद हुईं।
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दावा किया जा रहा है कि शहर में कहीं एक भी बूचड़खाना नहीं चल रहा है जबकि जानकारों की मानें तो नगर निगम और पुलिस के गठजोड़ की शह पर धंधा अब भी चालू है। अंतर सिर्फ इतना आया है कि अब दिन के बजाए रात में बूचड़खाने संचालित हो रहे हैं। 
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जबकि, नगर निगम के अलावा संबंधित थानोें को भी इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि अवैध बूचड़खाने संचालित न होने पाएं। शहर में बेनियाबाग, अर्दली बाजार का बूचड़खाना नगर निगम की देखरेख में चल रहा था।

वहीं, कमलगड़हा का संचालन निजी तरीके से होता है। शासन की सख्ती पर पिछले दिनों प्रशासन ने छापामारी कर कमलगड़हा स्थित स्लाटर हाउस को सील कर दिया था।
 

बीच शहर उतारा जा रहा मृत पशुओं का चमड़ा, हजारों बाशिंदे बेहाल

CM Yogi Adityanath order neutralizes, slaughterhouse running at Varanasi night
सीएम योगी आदित्यनाथ

उसके बाद नगर निगम और प्रशासन की टीम ने संयुक्त छापेमारी कर दावा किया था कि भेलूपुर के गौरीगंज सहित अन्य स्थानों पर जहां चोरी-छिपे बूचड़खाने चलते थे, वे सब पहले ही बंद कराए जा चुके हैं।

सूत्रों का दावा है कि यह सिर्फ शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है। दिन के बजाए रात में बूचड़खाने चल रहे हैं। इसकी जानकारी होने के बावजूद नगर निगम और संबंधित थाने की पुलिस आंखें मूंदे हुए है।

हुकुलगंज में मृत पशुओं के चमड़े उतारने का धंधा अब तक बंद नहीं कराया गया है। जबकि, गंदगी और दुर्गंध से आसपास के हजारों बाशिंदे बेहाल हैं। नगर निगम प्रशासन ने जल्द से जल्द इसे शहर से बाहर स्थानांतरित कराने की बात कही थी लेकिन इस पर भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाई है।


नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि ​सभी बूचड़खाने पहले ही बंद कराए जा चुके हैं। संबंधित थाने को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। नगर निगम की टीम भी नजर रखे हुए है। बावजूद इसके यदि बूचड़खानों का संचालन पाया गया तो न सिर्फ बूचड़खाना संचालक बल्कि जिम्मेदारों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। 

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