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सस्ते दर पर लोन देने के नाम पर ठगी, 20 और 50 का चेक लेकर निकाले साढ़े पांच लाख

Tue, 23 May 2017 09:18 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर
ब्यूरो,अमर उजाला,मिर्जापुर Updated Tue, 23 May 2017 09:18 PM IST
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cheque forgery in mirzapur after offer of low intrest loan
धोखाधड़ी - फोटो : demo
सस्ते ब्याज दर पर लोन लेने का लालच मिर्जापुर के दो युवकों पर भारी पड़ गया। एक प्राइवेट फाइनेंस  कंपनी के अधिकारी ने उनसे 20 और 50 रुपये का चेक लेकर उनके खाते से साढे़ पांच लाख निकाल लिए। इसकी जानकारी भुक्तभोगियों को मंगलवार को तब हुई जब उनके मोबाइल पर रुपये निकालने मैसेज आया। उन्होंने थाने में आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी की तहरीर दी है।
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अहरौरा थाना क्षेत्र के चौक बाजार निवासी शिवम अग्रहरि और संतोष अग्रहरि व कोईरान बाजार निवासी रवि मौर्या ने एक पखवारा पूर्व एक स्थानीय एजेंट के माध्यम से चार प्रतिशत ब्याज दर पर लोन लेने के लिए मुरादाबाद की गौरव बाग ट्रेडिंग कंपनी में आवेदन किया गया था।
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दो दिन बाद दो युवक कंपनी का अधिकारी बनकर आए और लोन स्वीकृत होने की सूचना दी। उन्होंने 20 और 50 रुपये का एक एक चेक तीनों से लिया। दो दिन बाद उनके खाते में पैसा भेजने का आश्वासन देकर चले गए। 15 मई को शिवम के खाते से दो लाख 72 हजार 500 रुपया निकाल लिया गया।
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वहीं दिल्ली के पहाड़गंज स्थित पीएनबी के क्लीरिंग शाखा से रवि मौर्या के खाते से दो लाख 71 हजार 500 रुपया निकाला गया। मंगलवार को जब खाते से पैसा निकालने की जानकारी हुई तो दोनों युवक हतप्रभ रह गए। धोखे से पैसा निकालने का आरोप लगाते हुए अहरौरा थाने पहुंच कर आरोपी के खिलाफ तहरीर दी।

इस संबंध में थानाध्यक्ष प्रवीण सिंह ने बताया कि अहरौरा के बैंक आफ बड़ौदा के खाते से दो लाख 72 हजार 500 रुपया गौरव दास पुत्र राकेश टिकरौल मुरादाबाद के आधार कार्ड  पर ठगों ने पैसा निकाल कर ट्रांसफार्मर कराया है।

वहीं दिल्ली के पीएनबी से मुकेश कुमार सरना द्वारा दो लाख 71 हजार 500 रुपया निकाला गया है। चेक में भरे गए रुपये की संख्या में फेरबदल करने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल किया गया है। यह नए किस्म की धोखाधड़ी का मामला है। छानबीन की जा रही है जल्द की मामले का खुलासा होगा।    

संतोष के सूझबूझ से बच गए उसके पैसे


संतोष की सूझबूझ से बैंक  में जमा उसके पांच लाख रुपये बच गए। 15 मई को जब एजेंट ने उससे अपना मोबाइल दो घंटे के लिए बंद करने को कहा तो उसे शक हुआ। उसने तत्काल बैंक में पहुंच कर कर्मचारियों को मामले से अवगत कराया और खाते से लेनेदेन पर रोक लगा दी। उसकी सूझबझ से उसका लाखों रुपया ठगों के हाथ में जाने से  बच गया। ऐसी ही सूझबूझ शिवम और रवि ने दिखाई होती  है तो वह भी ठगी का शिकार होने से बच जाते।
 
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