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बीएचयू में गैस से मरीजों की मौत, भाजपा विधायक पर लगे गंभीर आरोप
ब्यूरो,अमर उजाला, वाराणसी/ इलाहाबाद
Updated Wed, 23 Aug 2017 05:25 PM IST
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हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदर लाल चिकित्सालय में छह और सात जून को करीब 20 मरीजों के मौत के मामले में प्रदेश सरकार और महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से जवाब मांगा है।
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आरोप है कि मरीजों की मौत औद्योगिक गैस सप्लाई करने की वजह से हुई है, जिसका ठेका भाजपा विधायक हर्षवर्धन बाजपेई की कंपनी के पास है। घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है।
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भुवनेश्वर द्विवेदी की जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति अमर सिंह चौहान की पीठ सुनवाई कर रही है। याचिका पर अधिवक्ता केके रॉय और चार्ली प्रकाश ने पक्ष रखा। कोर्ट ने महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा को मौत के कारणों की जांच करके रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने यह भी पता लगाने का निर्देश दिया कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने का ठेका किसके पास है। याचिका में कहा गया है कि अस्पताल में गत छह और सात जून को करीब 20 मरीजों की अचानक मौत हो गई थी। इसकी वजह ऑक्सीजन की जगह गलत सप्लाई करना था।
मरीजों के मौत की सीबीआई जांच की मांग
BHU
अस्पताल में ऑक्सीजन की स्पलाई का ठेका इलाहाबाद में नैनी स्थित पारेर हाट इंड्रस्ट्रीयल इंटरप्राइजेज को दिया गया था। जबकि इस कंपनी के पास मेडिकल गैस के उत्पादन का लाइसेंस नहीं है। कंपनी न तो मेडिकल नाइट्रस ऑक्साइड और न ही मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन करती है।
खाद्य सुरक्षा और औषधी उत्पादन विभाग ने भी उपकुलपति को पत्र लिखकर सूचित किया है उनके निरीक्षण में सर सुंदर लाल अस्पताल में नॉन फार्मोपिकल ग्रेड की नाइट्रस अक्सीजन का उपयोग किया गया जो कि मेडिकल उपयोग के श्रेणी की गैस नहीं है।
याचिका में मांग की गई है कि इन मौतों की जांच सीबीआई से कराई जाए तथा पारेर हाट कंपनी को ठेका देने की भी जांच कराई जाए। कोर्ट ने महानिदेशक को एक कमेटी बनाकर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है।
खाद्य सुरक्षा और औषधी उत्पादन विभाग ने भी उपकुलपति को पत्र लिखकर सूचित किया है उनके निरीक्षण में सर सुंदर लाल अस्पताल में नॉन फार्मोपिकल ग्रेड की नाइट्रस अक्सीजन का उपयोग किया गया जो कि मेडिकल उपयोग के श्रेणी की गैस नहीं है।
याचिका में मांग की गई है कि इन मौतों की जांच सीबीआई से कराई जाए तथा पारेर हाट कंपनी को ठेका देने की भी जांच कराई जाए। कोर्ट ने महानिदेशक को एक कमेटी बनाकर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया है।