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57 घंटे बाद पुलिस को दी लिखित सूचना
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 10 May 2016 01:33 AM IST
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ब्लास्ट की घटना के बाद बीएचयू अस्पताल की इमरजेंसी के आसपास कम दिख रही मरीजों की संख्या।
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जांच एजेंसियों द्वारा अस्पताल में हुए ब्लास्ट में विस्फोटक पदार्थों के इस्तेमाल को खारिज किए जाने के बाद बीएचयू प्रशासन बैकफुट पर आ गया है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ब्लास्ट के पीछे साजिश की आशंका जता रहे थे, मगर सोमवार देर रात उनकी ओर से घटना के 57 घंटे बाद लंका पुलिस को जो लिखित सूचना दी गई उसमें केवल ब्लास्ट की घटना का जिक्र है। किसी प्रकार की साजिश की ओर इशारा नहीं किया गया है। लंका पुलिस ने बीएचयू के एमएस की ओर से शनिवार की घटना की लिखित जानकारी मिलने की तस्दीक की है। मालूम हो कि शनिवार की दोपहर सर सुंदरलाल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में हुए ब्लास्ट में 27 लोग जख्मी हुए थे।
घटना वाले दिन पुलिस का कहना था कि एसी की पाइप लाइन अथवा कंप्रेशर में विस्फोट हुआ है। यह विस्फोट ओवर हीटिंग के चलते होने की पुलिस ने आशंका जताई थी। मगर बीएचयू प्रशासन का कहना था कि एसी की वजह से इतना बड़ा धमाका नहीं हो सकता। बीएचयू ने अपने तर्क के समर्थन में उस कंपनी के इंजीनियर के बयान का भी हवाला दिया, जिस कंपनी का एसी अस्पताल में लगा है। इसी इंजीनियर के पास इन एसी के रखरखाव का भी जिम्मा है। अब पुलिस एसी कंपनी के इंजीनियर के बयान दर्ज करने की तैयारी में है।
उधर, सोमवार को एसी पाइप लाइन अथवा कंप्रेशर में ब्लास्ट की पुलिस की थ्योरी को बीएचयू प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने दावा किया कि एसी का कंप्रेशर फटा ही नहीं, वह तो जस का तस है। ऑक्सीजन सिलेंडर फटने का अनुमान भी गलत है क्योंकि इमरजेंसी में ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछी है। मालूम हो कि इमरजेंसी वार्ड में शनिवार की दोपहर भयानक विस्फोट हुआ था। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि दीवारें और फाल्स सीलिंग तक ढह गई थी। इस हादसे में 27 लोग घायल हुए थे।
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ब्लास्ट के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जा रही है। भीड़ भाड़ वाली जगहों पर सीसीटीवी कैमरे की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही साउंड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि वॉयस रिकार्डिंग भी हो सके। नए इमरजेंसी भवन को भी जल्द ही सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा।
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घटना वाले दिन पुलिस का कहना था कि एसी की पाइप लाइन अथवा कंप्रेशर में विस्फोट हुआ है। यह विस्फोट ओवर हीटिंग के चलते होने की पुलिस ने आशंका जताई थी। मगर बीएचयू प्रशासन का कहना था कि एसी की वजह से इतना बड़ा धमाका नहीं हो सकता। बीएचयू ने अपने तर्क के समर्थन में उस कंपनी के इंजीनियर के बयान का भी हवाला दिया, जिस कंपनी का एसी अस्पताल में लगा है। इसी इंजीनियर के पास इन एसी के रखरखाव का भी जिम्मा है। अब पुलिस एसी कंपनी के इंजीनियर के बयान दर्ज करने की तैयारी में है।
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उधर, सोमवार को एसी पाइप लाइन अथवा कंप्रेशर में ब्लास्ट की पुलिस की थ्योरी को बीएचयू प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ओपी उपाध्याय ने दावा किया कि एसी का कंप्रेशर फटा ही नहीं, वह तो जस का तस है। ऑक्सीजन सिलेंडर फटने का अनुमान भी गलत है क्योंकि इमरजेंसी में ऑक्सीजन पाइपलाइन बिछी है। मालूम हो कि इमरजेंसी वार्ड में शनिवार की दोपहर भयानक विस्फोट हुआ था। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि दीवारें और फाल्स सीलिंग तक ढह गई थी। इस हादसे में 27 लोग घायल हुए थे।
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ब्लास्ट के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद की जा रही है। भीड़ भाड़ वाली जगहों पर सीसीटीवी कैमरे की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही साउंड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ताकि वॉयस रिकार्डिंग भी हो सके। नए इमरजेंसी भवन को भी जल्द ही सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा।