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कालाधन बताकर खाते से उड़ाएं 2.5 लाख, सदमे में मौत
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Fri, 02 Dec 2016 02:12 AM IST
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शिवदासपुर निवासी 40 साल के विजयी पाल के साथ बड़ी ठगी हो गई। ठग ने उसके खाते में जमा मेहनत की कमाई को कालाधन बताकर ढाई लाख रुपये निकाल लिए। किसी तरह विजयी ने बाकी पैसे बचाने के लिए अपने खाते को ब्लॉक करा दिया। उसे उम्मीद थी कि पुलिस मामला दर्ज कर जांच-पड़ताल करेगी लेकिन पुलिस उसे दौड़ाती रही और टरकाती रही। परेशान विजयी डिप्रेशन में आ गया। बृहस्पतिवार को उसके सीने में दर्द हुआ और अस्पताल पहुंचने से पहले ही सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। हालात यह हो गए कि अंतिम संस्कार के लिए उसके परिजन चिता के लिए लकड़ी तक नहीं खरीद पाए।
नंदू पाल के इकलौते बेटे विजयी पाल ने मुंबई में पंद्रह साल तक ऑटो चलाकर जमीन खरीदी थी। मुंबई की जमीन बेचकर उसने पांच लाख अपने खाते में जमा कराए थे। खाते में ढाई लाख रुपये पहले से थे। अप्रैल में वह मुंबई से घर लौट आया था। घर बनवाना शुरू कर दिया था। उसकी दो बेटियां हैं। एक कक्षा नौ और दूसरी कक्षा सात में पढ़ रही हैं। इन दोनों के लिए भी उसने कुछ धन जमा कर रखा था।
मंगलवार को विजयी के पास फोन आया। उस समय वह ऑटो बनवा रहा था। फोन करने वाले ने खुद को आयकर अधिकारी बताया और कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा के मुंबई ऑफिस में मैनेजर के सामने बैठा हूं। कहा, आपके खाते का ब्योरा मेरे सामने हैं। आपके खाते में जमा पैसा काला धन है। विजयी ने सफाई दी पर कथित अधिकारी मानने को तैयार नहीं हुआ। खाते की जांच और ट्रांजक्शन की डिटेल जानने के लिए उसने विजयी से एटीएम कार्ड नंबर और पिन नंबर ले लिया। इसके बाद फोन कट गया।
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इसके बाद विजयी के फोन पर पैसे कटने के मैसेज आने लगे। इस पर वह भागते हुए घर पहुंचा और कागजात लेकर चांदपुर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचा। खाते को ब्लॉॅक करते-करते उसके एकाउंट से ढाई लाख रुपये निकाल लिए गए। बैक अधिकारियों ने मुंबई शाखा में संपर्क किया, जहां ऐसी किसी कार्रवाई से इन्कार किया गया। इस पर विजयी मंडुवाडीह थाने पहुंचा, जहां बैंक की डिटेल लाने के नाम पर शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया गया। बैंक की डिटेल ले जाने पर एसओ नहीं होने के बहाने उसे वापस कर दिया।
कहीं सुनवाई न होने के कारण विजयी डिप्रेशन में चला गया। बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे उसके सीने में दर्द उठा। पास ही मौजूद नर्सिंग होम में ले जाते-जाते उसकी मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। उधर, उसके घर में पैसे नहीं थे। खाता ब्लॉक हो जाने के कारण उसके खाते से भी पैसे नहीं निकल सके। हालात यह हो गया कि अंतिम संस्कार के लिए इतने भी पैसे इकट्ठे नहीं हो पाए कि विजयी का अंतिम संस्कार विधि-विधान से हो सके। मणिकर्णिका घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
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नंदू पाल के इकलौते बेटे विजयी पाल ने मुंबई में पंद्रह साल तक ऑटो चलाकर जमीन खरीदी थी। मुंबई की जमीन बेचकर उसने पांच लाख अपने खाते में जमा कराए थे। खाते में ढाई लाख रुपये पहले से थे। अप्रैल में वह मुंबई से घर लौट आया था। घर बनवाना शुरू कर दिया था। उसकी दो बेटियां हैं। एक कक्षा नौ और दूसरी कक्षा सात में पढ़ रही हैं। इन दोनों के लिए भी उसने कुछ धन जमा कर रखा था।
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मंगलवार को विजयी के पास फोन आया। उस समय वह ऑटो बनवा रहा था। फोन करने वाले ने खुद को आयकर अधिकारी बताया और कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा के मुंबई ऑफिस में मैनेजर के सामने बैठा हूं। कहा, आपके खाते का ब्योरा मेरे सामने हैं। आपके खाते में जमा पैसा काला धन है। विजयी ने सफाई दी पर कथित अधिकारी मानने को तैयार नहीं हुआ। खाते की जांच और ट्रांजक्शन की डिटेल जानने के लिए उसने विजयी से एटीएम कार्ड नंबर और पिन नंबर ले लिया। इसके बाद फोन कट गया।
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इसके बाद विजयी के फोन पर पैसे कटने के मैसेज आने लगे। इस पर वह भागते हुए घर पहुंचा और कागजात लेकर चांदपुर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचा। खाते को ब्लॉॅक करते-करते उसके एकाउंट से ढाई लाख रुपये निकाल लिए गए। बैक अधिकारियों ने मुंबई शाखा में संपर्क किया, जहां ऐसी किसी कार्रवाई से इन्कार किया गया। इस पर विजयी मंडुवाडीह थाने पहुंचा, जहां बैंक की डिटेल लाने के नाम पर शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया गया। बैंक की डिटेल ले जाने पर एसओ नहीं होने के बहाने उसे वापस कर दिया।
कहीं सुनवाई न होने के कारण विजयी डिप्रेशन में चला गया। बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे उसके सीने में दर्द उठा। पास ही मौजूद नर्सिंग होम में ले जाते-जाते उसकी मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया। उधर, उसके घर में पैसे नहीं थे। खाता ब्लॉक हो जाने के कारण उसके खाते से भी पैसे नहीं निकल सके। हालात यह हो गया कि अंतिम संस्कार के लिए इतने भी पैसे इकट्ठे नहीं हो पाए कि विजयी का अंतिम संस्कार विधि-विधान से हो सके। मणिकर्णिका घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह में उसका अंतिम संस्कार किया गया।