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खुद पर करें विश्वास तो सफलता चूमेगी कदम : आरपी सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:34 PM IST
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क्रिकेटर आरपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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बनारस पहुंचे भारतीय टीम के तेज गेंदबाज आरपी सिंह ने युवाओं को सफलता के टिप्स देते हुए कहा कि खुद को सपोर्ट करें, खुद पर विश्वास करें तो सफलता आपके कदम चूमेगी।
उन्होंने कहा कि क्रिकेट का टेस्ट संस्करण सबसे बेहतर है। मैं हमेसा टेस्ट प्लेयर कहलाना ही पसंद करूंगा। टेस्ट मैचों से खिलाड़ी की क्षमता और उसके खेल का पता चलता है।
हालांकि 20-20 और एकदिवसीय क्रिकेट ज्यादा होने के कारण टेस्ट मैंचों की संख्या पहले की अपेक्षा कम हो गई है। हालांकि टी-20 के फार्मेट ने नए खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए हैं।
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सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के बाबतपुर कैंपस में आयोजित रूबरू कार्यक्रम के दौरान आरपी सिंह ने कहा कि क्रिकेट में बेंच स्ट्रेंथ मजबूत होने के कारण बेहतर खिलाड़ी टीम इंडिया का हिस्सा बन रहे हैं। सचिन तेंदुलकर मेरे आदर्श थे और हैं। मेरा सपना था कि उनके साथ खेलने का मौका मिले और वह सपना पूरा हुआ।
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उन्होंने कहा कि क्रिकेट का टेस्ट संस्करण सबसे बेहतर है। मैं हमेसा टेस्ट प्लेयर कहलाना ही पसंद करूंगा। टेस्ट मैचों से खिलाड़ी की क्षमता और उसके खेल का पता चलता है।
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हालांकि 20-20 और एकदिवसीय क्रिकेट ज्यादा होने के कारण टेस्ट मैंचों की संख्या पहले की अपेक्षा कम हो गई है। हालांकि टी-20 के फार्मेट ने नए खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराए हैं।
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सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के बाबतपुर कैंपस में आयोजित रूबरू कार्यक्रम के दौरान आरपी सिंह ने कहा कि क्रिकेट में बेंच स्ट्रेंथ मजबूत होने के कारण बेहतर खिलाड़ी टीम इंडिया का हिस्सा बन रहे हैं। सचिन तेंदुलकर मेरे आदर्श थे और हैं। मेरा सपना था कि उनके साथ खेलने का मौका मिले और वह सपना पूरा हुआ।
पिछले आठ सालों में खेल में बहुत बदलाव आया
छात्रों के साथ आरपी सिंह
- फोटो : अमर उजाला
क्रिकेट के सबसे यादगार लम्हे के सवाल पर उनका कहना था कि पाकिस्तान के खिलाफ एकदिवसीय मुकाबले में पहला मैन आफ द मैच का खिताब मेरे लिए हमेसा सबसे खास है। इसके साथ ही लार्ड्स के मैदान पर पहली बार पांच विकेट लेने के बाद का लम्हा मेरे लिए बेहद खास रहा।
उन्होंने बताया कि पिछले आठ सालों में खेल में बहुत बदलाव आया है। स्कूलों ने अब खेलों को महत्व देना शुरू किया है इससे बेहतर खिलाड़ियों को तैयार करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
इस दौरान जैपुरिया स्कूल के बच्चों ने आरपी सिंह से कई सवाल किए।बच्चों ने जब आरपी सिंह से मार्गदर्शन की मांग की तो उन्होंने कहा कि मार्गदर्शन देने की नहीं उसका अनुसरण करने की चीज है।
किसी के देने से मार्गदर्शन नहीं मिलता है उसे आपको स्वयं अपने अंदर लाना पड़ता है। बच्चों ने पूर्व क्रिकेटर से जिंदगी में चुनौतियां, क्रिकेटर नहीं बनते तो क्या बनते, क्रिकेट के अलावा शौक सहित ढेर सारे सवाल किए।
उन्होंने बताया कि पिछले आठ सालों में खेल में बहुत बदलाव आया है। स्कूलों ने अब खेलों को महत्व देना शुरू किया है इससे बेहतर खिलाड़ियों को तैयार करने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
इस दौरान जैपुरिया स्कूल के बच्चों ने आरपी सिंह से कई सवाल किए।बच्चों ने जब आरपी सिंह से मार्गदर्शन की मांग की तो उन्होंने कहा कि मार्गदर्शन देने की नहीं उसका अनुसरण करने की चीज है।
किसी के देने से मार्गदर्शन नहीं मिलता है उसे आपको स्वयं अपने अंदर लाना पड़ता है। बच्चों ने पूर्व क्रिकेटर से जिंदगी में चुनौतियां, क्रिकेटर नहीं बनते तो क्या बनते, क्रिकेट के अलावा शौक सहित ढेर सारे सवाल किए।